
मसूद अजहर (फोटो- आईएएनएस)
सालों से जैश-ए-मोहम्मद का प्रमुख मसूद अजहर हर ईद-उल-फितर से पहले अपने समर्थकों के लिए ऑडियो संदेश जारी करता रहा है, जिसमें भारत के खिलाफ तीखे बयान शामिल होते थे। इस बार भी एक संदेश सामने आया, लेकिन इस संदेश में अजहर की भाषा और स्वर ने सुरक्षा एजेंसियों का ध्यान अपनी तरफ खींचा है। इस बार अजहर का संदेश कमजोर और थका हुआ नजर आया, जिससे संगठन के भीतर नेतृत्व संकट की अटकलें तेज हो गई हैं।
भारतीय एजेंसियों के अनुसार, इस बार के ईद संदेश में अजहर पहले की तरह आक्रामक नहीं दिखे। उनकी आवाज में कमजोरी और अस्थिरता साफ महसूस की गई। इससे यह संकेत मिल रहा है कि उनकी तबीयत ठीक नहीं है और वह सक्रिय नेतृत्व देने की स्थिति में नहीं हैं। यही वजह है कि संगठन के भीतर असंतोष बढ़ रहा है। कई सदस्य मानते हैं कि वर्तमान स्थिति के कारण संगठन की गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं और योजनाएं आगे नहीं बढ़ पा रही हैं।
एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी सामने आया है कि इस समय लश्कर-ए-तैयबा की गतिविधियां ज्यादा तेज हो गई हैं, जबकि जैश-ए-मोहम्मद अपेक्षाकृत शांत दिख रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, लश्कर के सदस्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ संपर्क बढ़ा रहे हैं, जबकि जैश की मौजूदगी बड़े घटनाक्रमों में नजर नहीं आ रही। इससे यह संकेत मिलता है कि जैश के भीतर नेतृत्व को लेकर खींचतान चल रही है। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में मौजूद लॉन्चपैड पर भी लश्कर के ऑपरेटिव ज्यादा सक्रिय बताए जा रहे हैं।
संगठन के भीतर सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगला प्रमुख कौन होगा। एक पक्ष चाहता है कि मसूद अजहर के परिवार के किसी सदस्य को नेतृत्व दिया जाए, ताकि संगठन में एकता बनी रहे। वहीं दूसरा पक्ष किसी अनुभवी ऑपरेशनल कमांडर को प्रमुख बनाने के पक्ष में है। अब्दुल जब्बार, जो सैन्य गतिविधियों का जिम्मा संभाल रहे हैं, एक मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं। दूसरी ओर, अजहर के बेटे अब्दुल्ला अजहर और भाई तल्हा अल सैफ का नाम भी चर्चा में है, लेकिन उनकी भूमिका मुख्य रूप से वित्तीय और डिजिटल संचालन तक सीमित रही है।
हाल ही में जारी ऑडियो में मसूद अजहर ने अपने साले यूसुफ अजहर की मौत की पुष्टि की, जो ऑपरेशन सिंदूर में मारा गया था। हालांकि उन्होंने अपने भाई अब्दुल रऊफ अजहर का जिक्र नहीं किया, जिससे उनके जीवित होने पर सवाल उठने लगे हैं। एजेंसियों का मानना है कि संगठन अपने शीर्ष नेताओं की मौत छिपाकर कैडर का मनोबल बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा हालात को देखते हुए नेतृत्व परिवर्तन लगभग तय है और इसमें बाहरी एजेंसियों की भूमिका भी अहम हो सकती है।
Published on:
19 Mar 2026 02:39 pm
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