
Noida Supertech Twin Tower live Update: नौ साल की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद, रविवार (28 अगस्त) को नोएडा के सुपरटेक ट्विन टावरों को मलबे में बदल दिया जाएगा। ये दोनों टावर्स - 29 मंजिला सेयान और 32 मंजिला एपेक्स - सुपरटेक लिमिटेड की एमराल्ड कोर्ट परियोजना का हिस्सा हैं और निर्माण के संबंध में कई नियमों का उल्लंघन करते हुए पाए गए थे। आवासीय कॉलोनी के ग्रीन एरिया में अवैध रूप से बनाए गए इन ट्विन टॉवरों का गिराया जाना दोपहर 2.30 बजे निर्धारित है। इसके लिए नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे दोपहर 2.15 बजे से 2.45 बजे के बीच विध्वंस अभियान के लिए बंद रहेगा। इस तरह दावा किया जा रहा है कि नोएडा पुलिस यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए केवल आधे घंटे के लिए यातायात की आवाजाही को प्रतिबंधित करने का प्रयास करेगी।
कुतुब मीनार से अधिक है टॉवरों की ऊंचाई
नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे के पास सेक्टर 93 ए में स्थित लगभग 850 फ्लैटों वाले इन टावरों की ऊंचाई लगभग 100 मीटर है - कुतुब मीनार से अधिक। इसकी ऊंचाई का अंदाजा इस बात से गलाया जा सकता है कि दिल्ली का कुतुब मीनार 73 मीटर लंबा है। इन दोनों टावरों में 915 फ्लैट, 21 दुकानें और 2 बेसमेंट को बनाया गया था। बारूद लगाने के बाद इमारतों को चार्ज करने से लेकर इलाके की सफाई तक की तैयारी पूरी कर ली गई है। पास के अपार्टमेंट परिसरों - एटीएस ग्रीन्स विलेज और एमराल्ड कोर्ट के निवासियों को रविवार सुबह तक खाली करा लिया गया है। पुलिस के मुताबिक एमराल्ड कोर्ट में 15 टावर और एटीएस गांव में करीब 25 टावर और चार विला हैं।
नियंत्रित विस्फोट के माध्यम से किया जाएगा ध्वस्त
सुपरटेक टावरों को 'नियंत्रित विस्फोट' के माध्यम से ध्वस्त कर दिया जाएगा। सुपरटेक टावरों को ध्वस्त करने के काम को अंजाम देने के लिए मुंबई स्थित एडिफिस इंजीनियरिंग ने केरल की माराडू इमारतों के विध्वंस को अंजाम देने वाली दक्षिण अफ्रीका की जानी मानी जेट कंपनी टीम के साथ भागीदारी की है। ये वही कंपनी है जिसने हाल में आबू धावी में इस तरह की 100 मंजिल से अधिक ऊंची बिल्डिंग को गिराया था।
खास है नियंत्रित विस्फोट की तकनीक
नियंत्रित विस्फोट का अर्थ है कि विस्फोटकों को रणनीतिक रूप से रखने और आसपास के क्षेत्र को न्यूनतम नुकसान सुनिश्चित करने के लिए विस्फोट के बाद यह इमारत यहीं ढह जाएगी। दोनों टावरों में करीब 3,700 किलोग्राम विस्फोटक डाला गया है। एपेक्स टावर में 11 प्राथमिक ब्लास्ट फ्लोर हैं, जहां फ्लोर के सभी कॉलम में विस्फोटक हैं, और सात सेकेंडरी फ्लोर हैं, जहां 60 फीसदी कॉलम ब्लास्ट किए जाएंगे। Ceyane में 10 प्राथमिक ब्लास्ट फ्लोर हैं।
सारी रात चलती रही अंतिम तैयारी
दक्षिण अफ्रीका से आई जेट डेमोलिशन, एडफिस इंजीनियरिंग और सीबीआरआइ की टीम के साथ नोएडा अथॉरिटी की टीम टावर के अंदर विस्फोटक से जुड़े वायर की जांच और ट्रिगर दबाए जाने की तैयारियों को अंतिम रूप देते रहे। नोएडा प्राधिकरण और पुलिस अधिकारी आसपास की व्यवस्था को दुरुस्त करने में जुटे रहे।
एपेक्स 103 मीटर और सियान 97 मीटर है ऊंचा
सेक्टर-93-ए में बने 103 मीटर ऊंचे एपेक्स और 97 मीटर ऊंचे सियान टावर को ध्वस्त करने के लिए 3700 किलो विस्फोटक अलग-अलग फ्लोर पर लगाया गया है। सुरक्षा कारणों से एमराल्ड कोर्ट और आसपास की सोसायटी के करीब पांच हजार लोगों से रविवार सुबह सात बजे तक फ्लैट खाली कराए जाएंगे। इसके अलावा करीब तीन हजार वाहन और 200 पालतू पशुओं को भी बाहर निकालने के काम को अंतिम रूप दिया जा रहा है। इस तरह से भारत के सबसे ऊंचे आवासीय टॉवर के ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया की उल्टी गिनती शुरू हो गई है।
दोपहर ढाई बजे दबाया जाएगा ट्रिगर
एडफिस इंजीनियरिंग के प्रोजेक्ट मैनेजर मयूर मेहता ने बताया कि पुलिस से क्लीयरेंस मिलने पर दोपहर ढाई बजे ट्रिगर दबाया जाएगा। डीसीपी ट्रैफिक गणेश पी साहा ने बताया कि डायवर्जन लागू करने का कार्य देर रात पूरा कर लिया गया। नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेस-वे 2:15 से लेकर 2:45 तक बंद रहेगा।
धूल का गुबार दिखा तो बंद रहेगा एक्सप्रेस-वे
धूल का गुबार अगर एक्सप्रेस-वे की तरफ रहा, तो इसे कुछ और देर के लिए बंद रखा जा सकता है। एक्सप्रेस-वे के बंद रहने की जानकारी गूगल मैप पर करीब पौने घंटे पहले दिखाई देनी शुरू हो जाएगी, ऐसे में वैकल्पिक मार्ग भी गूगल मैप द्वारा बताया जाएगा।
400 पुलिसकर्मी हुए तैनात
डीसीपी सेंट्रल राजेश एस ने बताया कि करीब 400 पुलिसकर्मियों के साथ पीएसी और एनडीआरएफ के जवान भी तैनात किए जाएंगे। सीएमओ डा सुनील शर्मा ने बताया कि छह एंबुलेंस मौके पर रहेंगी और जिला अस्पताल के साथ फैलिक्स और यथार्थ अस्पताल में भी बेड आरक्षित किए गए हैं।
60 हजार टन निकलेगा मलबा
नोएडा प्राधिकरण सीईओ रितु माहेश्वरी ने बताया कि करीब 60 हजार टन मलबा दोनों टावर से निकलेगा। जिसमें से करीब 35 हजार टन मलबे का निस्तारण कराया जाएगा। ध्वस्तीकरण के बाद उठने वाली धूल को साफ करने के लिए कर्मचारी, स्वीपिंग मशीन, एंटी स्माग गन और वाटर स्पि्रंक्लर साइट पर मौजूद रहेंगे।
आधे घंटे तक बंद रहेगा एक्सप्रेस-वे
ज्ञात हो कि इस इमारत को देश के उच्चतम न्यायालय के आदेश पर गिराया जा रहा है। इसके लिए प्रशासन ने युद्ध स्तर पर तैयारी की है। मौके पर राष्ट्रीय आपदा मौचन बल (एनडीआरएफ) एक टुकड़ी तैनात रहेगी। नोएडा के इस ट्विन टावर के ध्वस्तीकरण के बाद आवासीय परिसर के निकट प्रशासन ने धूल और वायु प्रदूषण की रोकथाम के लिए 15 स्थानों पर एंटी स्मॉग गन के साथ एक वाटर टैंकर की भी प्रबंध किया गया है। आवश्यकता पड़ने पर और एंटी स्मॉग गन भी लगाई जाएंगी। ध्वस्तीकरण के बाद करीब 80 हजार टन मलबे का निस्तारण किया जाएगा जिसमें से करीब 50 हजार टन मलबे का इस्तेमाल साइट को भरने के लिए किया जाएगा।
हवाई क्षेत्र भी किया गया बंद
विस्फोटों के कारण उत्पन्न होने वाली भारी मात्रा में धूल के कारण, ट्विन टावरों के आसपास का लगभग 2 किमी का हवाई क्षेत्र भी कुछ समय के लिए उड़ानों के लिए अनुपलब्ध रहेगा। ड्रोन के इस्तेमाल पर प्रतिबंध 26 अगस्त से लागू हुआ था और यह 31 अगस्त तक लागू रहेगा।
एक्सप्लोडर को जोड़ना
“एडिफिस इंजीनियरिंग के प्रोजेक्ट मैनेजर मयूर मेहता के अनुसार एक बार जब सभी निवासियों के हट जाने के पुष्टि हो जाएगी और सभी टीमें इमारतों से नीचे आ जाएंगी तो दो टावर: एपेक्स (32 मंजिल) और सियेने (29 मंजिल) को आपस में केबल से जोड़ा जाएगा।
दोपहर 2.30 बजे दबेगा ट्रिगर, 100 प्रतिशत होगा सुरक्षित
उन्होंने कहा, “एक बार जब हमें पुलिस विभाग से मंजूरी मिल जाती है तो रविवार दोपहर 2.30 बजे हम बटन दबा देंगे।” यह पूछे जाने पर कि सुरक्षित विध्वंस को लेकर वह कितने आश्वस्त हैं, मेहता ने कहा: “100%। मेरे पास कोई और शब्द नहीं है। हम 100% आश्वस्त हैं।”
किया गया है 100 करोड़ का बीमा
उन्होंने कहा, “हमें आयोजन के दौरान नुकसान के लिए 100 करोड़ रुपये का बीमा मिला है, लेकिन हमें विश्वास है कि हमें इसका दावा नहीं करना पड़ेगा,” उन्होंने कहा, “हम जो कर रहे हैं, उसके साथ हम बहुत सटीक हैं और पूरी तरह से आश्वस्त हैं। यदि विस्फोटकों के लिए भवन में ड्रिल किया गया छेद 2.634 मिमी होना चाहिए, तो हम अंतिम दशमलव अंक तक इसमें सटीक रहे हैं। अगर हम गणना करें कि 9,640 छेद ड्रिल किए जाने हैं, तो यह 9,640 होना ही चाहिए...न इससे कम और न इससे अधिक। जिस तरह से हम कल्पना कर रहे है हैं, उसमें गिरावट आने के लिए हमें सटीक होना होगा।”
आसपास की इमारतों को किया जाएगा दुरुस्त
मेहता ने कहा कि पास की इमारतों के पेंट या प्लास्टर में “कॉस्मेटिक दरारें” हो सकती हैं जो पहले ही कमजोर हो चुकी हैं और कुछ कांच की खिड़कियों में भी दरारें आ सकती हैं। “हमें उसी दिन काम के लिए पहले ही एक ठेकेदार मिल गया है। सब कुछ साफ दिखने के बाद टीमें उस दिन शाम छह बजे तैयार हो जाएंगी और वे इन टूट फूट को ठीक करना शुरू कर देंगी।
Updated on:
28 Aug 2022 09:24 am
Published on:
28 Aug 2022 08:16 am

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