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इंग्लैंड में रह रही बुज़ुर्ग भारतीय सिख महिला को मिला ज़बरदस्त समर्थन, सरकार के भारत भेजे जाने के फैसले के खिलाफ हुए लोग

Gurmeet Kaur Deportation: इंग्लैंड में रह रही भारतीय मूल की बुज़ुर्ग सिख महिला गुरमीत कौर को यूके सरकार भारत भेजना चाहती है। पर लोग सरकार के इस फैसले के खिलाफ हो गए हैं और गुरमीत का समर्थन कर रहे हैं।

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Gurmeet Kaur

इंग्लैंड के वेस्ट मिडलैंड्स के स्मेथविक में भारतीय मूल की बुज़ुर्ग सिख महिला गुरमीत कौर के सामने एक बड़ी परेशानी खड़ी हो गई है। दरअसल 78 साल की गुरमीत विधवा है और यूके में अब गुरमीत का कोई परिवार नहीं है और यूके सरकार गुरमीत को पंजाब भेजना चाहती है। हालांकि यह मामला नया नहीं है। पहली बार 2019 में गुरमीत को भारत वापस भेजे जाने की चर्चा शुरू हुई थी। गुरमीत 2009 में इंग्लैंड गई थी और तभी से वहीँ रह रही है। पर अब यूके सरकार गुरमीत को वापस भारत में पंजाब भेजना चाहती है। पर कई लोग इसके खिलाफ हैं।


सरकार के फैसले के खिलाफ लोग कर रहे हैं गुरमीत का समर्थन

2019 में पहली बार इस मामले के सामने आने के बाद से ही लोग यूके सरकार के गुरमीत को भारत भेजे जाने की बात के खिलाफ हैं। 2020 में इंग्लैंड में रह रहे कई लोगों ने एक ऑनलाइन पीटिशन भी तैयार की। इनमें से ज़्यादातर सिख समुदाय के लोग ही थे। उन्होंने पीटिशन तैयार कर गुरमीत को इंग्लैंड से निकाले जाने के फैसले का विरोध किया। 2020 से अब तक करीब 65 हज़ार लोग गुरमीत के समर्थन में इस पीटिशन पर साइन कर चुके हैं। सोशल मीडिया पर भी लोग ‘हम सभी गुरमीत कौर हैं’ अभियान चलाकर गुरमीत का समर्थन कर रहे हैं।


स्मेथविक के स्थानीय सिख समुदाय ने गुरमीत को अपनाया

गुरमीत 2009 से ही वेस्ट मिडलैंड्स के स्मेथविक में रह रही है। वहाँ के स्थानीय सिख समुदाय के अनुसार गुरमीत का इंग्लैंड के साथ ही भारत में भी कोई परिवार नहीं है। इसलिए स्थानीय सिख समुदाय ने गुरमीत को अपना लिया है और गुरमीत के रहने और देख-रेख की ज़िम्मेदारी ली है।

यूके के गृह विभाग की प्रतिक्रिया

यूके के गृह विभाग के प्रवक्ता ने इस बारे में कहा कि गुरमीत अब भी पंजाब में अपने गांव के लोगों के साथ संपर्क में है। यूके के गृह विभाग का ऐसा मानना है कि गुरमीत को पंजाब भेजना सही फैसला होगा और वह पंजाब जाकर धीरे-धीरे खुद को उस परिवेश में ढाल लेंगी।

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