
ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची (फोटो- एएनआई)
US-Iran Talks: मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष को खत्म करने के लिए ईरान और अमेरिका के बीच हाल ही में पाकिस्तान में उच्चस्तरीय बातचीत हुई थी। करीब एक महीने से ज्यादा समय से दोनों देशों के बीच जंग चल रही है और इस युद्ध को खत्म करने के लिए यह अहम वार्ता की गई थी जिस पर वैश्विक स्तर पर उम्मीदें टिकी थीं। हालांकि इस वार्ता के दौरान दोनों देशों के बीच सहमति नहीं बन पाई और वार्ता विफल हो गई। अब इस मामले पर ईरान का बयान सामने आया है। ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने वार्ता को लेकर जानकारी देते हुए बताया कि यह समझौता लगभग तय होने के बावजूद अंतिम क्षणों में अटक गया।
अब्बास अराघची ने सोमवार को बयान देते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच समझौता सिर्फ इंच भर दूरी पर था, लेकिन आखिरी समय में कई अड़चनें सामने आ गईं। उन्होंने कहा कि ईरान ने पूरी ईमानदारी से बातचीत में हिस्सा लिया, लेकिन मैक्सिमलिज्म, शिफ्टिंग गोलपोस्ट और ब्लॉकेड जैसी स्थितियों ने समझौते को रोक दिया। अराघची ने यह भी कहा कि इस वार्ता से कोई सकारात्मक सबक नहीं निकला। उनके अनुसार, अच्छी नीयत का जवाब अच्छी नीयत से मिलता है, जबकि दुश्मनी का जवाब दुश्मनी ही होता है। इस बयान से स्पष्ट है कि ईरान वार्ता के विफल होने के लिए दूसरे पक्ष को जिम्मेदार ठहरा रहा है।
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने भी संकेत दिया कि समझौते की संभावनाएं अभी खत्म नहीं हुई हैं, लेकिन उन्होंने अमेरिका से अपने रवैये में बदलाव की अपील की है। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिकी सरकार तानाशाही रवैया छोड़ दे और ईरान के अधिकारों का सम्मान करे तो समझौते का रास्ता निकल सकता है। वहीं, ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर कालीबाफ ने भी बातचीत में भरोसे की कमी को प्रमुख कारण बताया। उनके अनुसार, ईरान की टीम ने सकारात्मक प्रस्ताव रखे, लेकिन विरोधी पक्ष विश्वास जीतने में नाकाम रहा। इससे साफ है कि दोनों पक्षों के बीच अविश्वास अभी भी गहरा बना हुआ है।
वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मुद्दे पर अलग ही तस्वीर पेश की है। उन्होंने दावा किया कि अधिकांश मुद्दों पर सहमति बन गई थी, लेकिन परमाणु कार्यक्रम पर ईरान पीछे नहीं हटा। ट्रंप ने कहा कि सबसे अहम मुद्दा न्यूक्लियर था, जिस पर सहमति नहीं बन सकी। इसके साथ ही उन्होंने ईरान के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए समुद्री ब्लॉकेड लागू करने का ऐलान किया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने घोषणा की कि ईरानी बंदरगाहों में आने-जाने वाले जहाजों पर निगरानी और नियंत्रण किया जाएगा। हालांकि, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही पर रोक नहीं होगी। इस कदम से क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
Updated on:
13 Apr 2026 08:50 am
Published on:
13 Apr 2026 08:50 am
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