
Goswami Tulsidasji
अच्छे अच्छों को पता नहीं चल पाता जीवन कब बिखर जाता है, उलझ जाता है। कइयों की पूरी जिंदगी बीत जाती है समेटते, सुलझाते हुए। भारतीय संस्कृति की यह विशेषता है कि हमारे पास कई ऐसे शास्त्र हैं जिनके माध्यम से हम बिखरी जिंदगी समेट सकते हैं। ऐसा ही एक छोटा-सा साहित्य है श्रीहनुमान चालीसा।
विद्वानों में इसे लेकर मतांतर है कि हनुमान चालीसा, गोस्वामी तुलसीदास ने लिखी है। विद्वत्ता चाहे जो भी कहे, लेकिन जनमानस में, लोक मान्यता में तो यह तुलसीदास के नाम से ही जानी जाती है। बहुत बालपन में लिखी थी तुलसीदास ने हनुमान चालीसा। एक बालक ने पवनपुत्र से जो सीधी बातचीत की थी, हनुमान चालीसा उसका अंश है। एक बच्चे की पुकार सुनकर पवनसुत इसकी पंक्ति-पंक्ति, शब्द-शब्द में उतरे हैं।
किसी को भी सुख, सफलता, शांति प्रदान करने वाली सरलतम पंक्तियां हैं हनुमान चालीसा। भक्तों के लिए तो एक पूरी आचार संहिता है। अब समय आ गया है कि करोड़ों की कंठहार हनुमान चालीसा प्रत्येक के शरीर के भीतर के सात चक्रों से भी गुजरे। वर्षों से भक्ति कर रहे लोग अशांत पाए जाते हैं।
भक्ति को योग से जोडऩा होगा, शांति तब ही मिलेगी। हनुमान चालीसा को प्राणायाम से जोडऩे पर ध्यान करना आसान होगा। प्राणायाम वायु नियंत्रण का विज्ञान है और हनुमान, वायु के देवता हैं। यह योगियों का मान्य तथ्य है।

Published on:
02 Jan 2016 08:56 am

बड़ी खबरें
View Allपूजा
धर्म/ज्योतिष
ट्रेंडिंग
