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नोटबंदी को लेकर लोकसभा की कार्यवाही गत 13 दिन से ठप होने के कारण बीजपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी बुधवार को बुरी तरह से नाराज हो गए। उन्होंने इसके लिए सरकार और विपक्ष दोनों को जमकर फटकार लगाई।
शून्यकाल के दौरान जब दोपहर में 12 बजकर 45 मिनट पर सदन की कार्यवाही स्थगित हुई तो आडवाणी ने पास खड़े सदस्यों से जानना चाहा कि कितने बजे तक के लिए सदन स्थगित हुआ है। इस पर उन्हें बताया गया कि सदन दो बजे तक के लिए स्थगित हुआ है। इस पर आडवाणी भड़क उठे। उन्होंने तमतमाते हुए कहा कि यह बहुत लज्जाजनक बात है। लोकसभा अध्यक्ष सदन नहीं चला रही हैं और संसदीय कार्य मंत्री भी सदन नहीं चला रहे हैं। सदन अपने आप से ही चल रहा है।
आडवाणी के इस तरह से नाराज होने से वहां मौजूद संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार के हाथ पांव फूल गए। वह लगभग दौड़ते हुए आडवाणी के पास पहुंचे और उन्हेें ऊपर प्रेस दीर्घा में मौजूद पत्रकारों की मौजूदगी का हवाला देते हुए धीरे बोलने का अनुरोध किया। इस पर श्री आडवाणी ने कहा कि वह बाहर सार्वजनिक रूप से यह बात कहेंगे।
इस पर अनंत कुमार ने उन्हें समझाने की कोशिश की कि विपक्ष की जिद के कारण सदन नहीं चल पा रहा है, तो आडवाणी ने गुस्से से कहा कि दोनों ही इसके लिए जिम्मेदार हैं। बाद में संसदीय कार्य राज्य मंत्री एसएस आहलूवालिया उन्हें मनाकर सदन के बाहर ले गए।
उधर, संसदीय कार्य मंत्री इस अप्रत्याशित स्थिति पर बात करने के लिए लोकसभा अध्यक्ष के चेंबर में चले गए। बाद में अनंत कुमार ने मीडिया से बातचीत में कहा कि आडवाणी लोकसभा अध्यक्ष का पूरा सम्मान करते हैं। वह दरअसल विपक्ष के रवैये के कारण सदन नहीं चलने से नाराज हैं।
इससे पहले आडवाणी ने सदन में शोरशराबा जारी रहने और काम नहीं हो पाने पर सूचना प्रसारण एवं शहरी विकास मंत्री एम. वेंकैया नायडू से अनौपचारिक रूप से वेतन नहीं लेने की बात कही थी। बाद में वेंकैया नायडू ने संवाददाताओं से बातचीत में आडवाणी के गुस्से के बारे में कहा कि यह एक वरिष्ठ सांसद एवं राजनेता का क्षोभ है।
Published on:
07 Dec 2016 03:26 pm
