
एनएसजी में भारत की सदस्यता को लेकर काफी कुछ चर्चा है। अमेरिका ने भारत का पूरजोर समर्थन किया है वहीं चीन ने इसका विरोध जताया है। एनएसजी में भारत की सदस्यता को लेकर हालही में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अमेरिका यात्रा के दौरान भी दावा पेश किया। इसके लिए एनएसजी समूह देशों की बैठक भी हुई। इसमें अधिकांश देशों ने भारत की सदस्यता के लिए सकारात्मक इशारा दिया है। आईए जानते हैं आखिर क्या है एनएसजी।
दरअसल एनएसजी परमाणु आपूर्तिकर्ता बहुत से देशों का एक समूह है। यह समूह परमाणु शस्त्र बनाने योग्य सामग्री के निर्यात एवं पुन: हस्तान्तरण को नियंत्रित करता है। इसका वास्तविक परमाणु शस्त्रों के प्रसार को रोकना है। एनएसजी का गठन वर्ष 1974 में भारत के परमाणु परीक्षण की प्रतिक्रिया स्वरूप किया गया था। एनएसजी में अमेरिका, रूस, फ्रांस और चीन समेत 48 सदस्य हैं। एनएसजी का मकसद परमाणु हथियार के प्रसार को रोकने के अलावा शांतिपूर्ण काम के लिए ही परमाणु सामग्री और तकनीक की सप्लाई की जाती है। न्यूक्लियर सप्लायर ग्रुप आम सहमति से काम करता है। सबसे अहम बात एनएसजी सदस्य के लिए परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर जरूरी है।
एनएसजी का कोई स्थाई कार्यालय नहीं है। एनएसजी आमतौर पर र्वाषिक बैठक करता है। सभी मामलों में फैसला सर्वसम्मति के आधार पर होता है। आरम्भ में इसके केवल सात सदस्य थे - कनाडा, पश्चिमी जर्मनी, फ्रांस, जापान, सोवियत संघ, युनाइटेड किंगडम एवं संयुक्त राज्य अमेरिका (यूएसए)। सन 1976-77 में इसमें और देश शामिल कर लिए गए और इसकी सदस्य संख्या 15 हो गई। 1990 तक 12 और देश इसमें सम्मिलित हो गए। चीन इसमें सन 2004 में शामिल हुआ।
Published on:
11 Jun 2016 12:39 pm
