रामायण में हनुमान और महाभारत में भीम के शौर्य व बल की कहानियां तो सबने सुनी होगी लेकिन आधुनिक युग में भी एक ऐसा भारतीय पहलवान हुआ, जिसके कारनामों को सुनकर रोंगटे खड़े हो जाएं।
रामायण में हनुमान और महाभारत में भीम के शौर्य व बल की कहानियां तो सबने सुनी होगी लेकिन आधुनिक युग में भी एक ऐसा भारतीय पहलवान हुआ, जिसके कारनामों को सुनकर रोंगटे खड़े हो जाएं।
वे हैं.. प्रोफेसर कोडी राममूर्ति नायडू। कहा जाता है कि वे सांड के सींग पकड़कर उसे एक बार में ही पटक दिया करते थे।
ऐसी जांबाजी के कारण ही वे 'भारत का हक्र्युलिस' और 'कलयुग का भीम' कहलाए। अंग्रेज भी उनकी ताकत व हिम्मत का लोहा मानते थे।
नायडू की शैतानियों से परेशान थे पिता...
नायडू का जन्म आंध्र प्रदेश के वीरघट्टम गांव में हुआ था। कम उम्र में ही मां का निधन होने से वे निरंकुश स्वभाव के हो गए। उनका मन पढ़ाई में कम और अपने हमउम्र लड़कों की मार-पिटाई में ज्यादा लगता था। गांव वाले नायडू की शिकायत लेकर वैंकय्या के पास आते।
वैंकय्या ने जब एक बार डांटा तो वे घर छोड़कर जंगल भाग गए। हफ्तेभर जंगल में रहने के बाद जब गांव लौटे तो अपने साथ चीतेे का एक बच्चा भी उठा लाए। वे दिनभर उसे कंधे पर बिठाकर घूमते रहते। डरके मारे गांव वालों ने घर से निकलना बंद कर दिया।
बेटे की शैतानियों और लगातार गांव वालों की शिकायतों से परेशान होकर वैंकय्या ने इकलौते बेटे को अपने छोटे भाई नारायण स्वामी के पास विजयनगर भेज दिया जो वहां पुलिस में थे।
मजाक के पात्र भी बने...
विजयनगर पढऩे गए नायडू वहां सिपाहियों को रोजाना शारीरिक प्रशिक्षण लेते देखा करते थे। इससे प्रेरित होकर उन्होंने भी मजबूत शरीर के लिए कसरत करनी शुरू कर दी। भतीजे को लगन के साथ कसरत करते देख नारायण स्वामी ने उनका दाखिला फिटनेस सेंटर में करा दिया। कुछ महीनों बाद जब नायडू पहलवान बनने का सपना लिए गांव लौटे तो लोगों ने उनका मजाक उड़ाना शुरू कर दिया।
लोगों के तानों से आहत नायडू आपा खोकर उनसे लड़ पड़ते। पिता ने उन्हें वापस विजयनगर भेज दिया। चाचा नारायण स्वामी ने इस बार उन्हें पहलवानी के प्रशिक्षण के लिए मद्रास (चेन्नई) भेजा। वहां से एक साल की ट्रेनिंग लेकर विजयनगर लौटने क बाद नायडू को एक स्कूल में फिजिकल इंस्ट्रक्टर की नौकरी मिल गई। नौकरी के साथ राममूर्ति नायडू ने अपना शक्ति प्रदर्शन भी जारी रखा।
जांबाजी के प्रमुख किस्से...
एक बार लॉर्ड मिंटो विजयनगर आए। राममूर्ति को थोड़ी शैतानी सूझी। उन्होंने मिंटो की लंबी-चौड़ी मोटर कार को पीछे से लोहे की जंजीरों से कसकर पकड़ लिया और ड्राइवर को कार स्टार्ट करने के लिए कहा। लॉर्ड मिंटो आश्चर्य में पड़ गए जब उन्होंने देखा कि कार एक इंच भी आगे नहीं बढ़ी।
सर्कस से हुआ नाम...
लॉर्ड मिंटो की कार रोकने वाली घटना के बाद कोडी राममूर्ति नायडू की पहलवानी की चर्चाएं दूर-दूर तक होने लगीं। तारीफों से उत्साहित नायडू ने सोचा कि क्यों ने अपने शारीरिक बल का प्रदर्शन कर लोगों का मनोरंजन भी किया जाए और साथ ही पैसा भी कमाया जाए।
इस इच्छा को पूरा करने में उनके करीबी मित्र पोट्टी पुन्थलू ने भी उनका पूरा सहयोग किया। इसके बाद जल्द ही दोनों ने मिलकर एक सर्कस कंपनी शुरू कर दी।सर्कस में अपने हैरतअंगेज कारनामे दिखाकर उन्होंने कई कीर्तिमान स्थापित किए।