जिन मंत्रियों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है, उनमें यशोधरा राजे सिंधिया शामिल हैं। उनसे उद्योग विभाग छीन लिया है। यह शायद पहला ऐसा मौका होगा, जब कोई अफसर मंत्री पर भारी पड़ गया। सुलेमान से लड़ाई का नुकसान यशोधरा को भुगतना पड़ा है। वहीं, बड़ा झटका वित्त मंत्री जयंत मलैया को भी लगा है। उनसे मलाईदार विभाग जलसंसाधन छीन लिया गया है। जबकि वह वित्त विभाग छोडऩे के लिए मुख्यमंत्री को कई दफा बोल चुके थे। इसे मलैया के घटते कद से जोड़कर देखा जा रहा है। इतना ही नहीं, मुख्यमंत्री के करीबी भूपेंद्र सिंह से लड़ाई का नुकसान गोपाल भार्गव को भी झेलना पड़ा है। उनसे सहकारिता जैसा बड़ा विभाग कम कर लिया गया। विजय शाह को भी मुख्यमंत्री से दूरियों के चलते नुकसान उठाना पड़ा है। उन्हें खाद्य से हटाकर स्कूल शिक्षा में भेज दिया गया है। अगर कोई फैसला आश्चर्यजनक माना जा रहा है तो वह लालसिंह आर्य का है। जिन्हें विस्तार में कैबिनेट मंत्री के तौर पर देखा जा रहा था। लेकिन वहां झटका मिलने के बाद यहां भी नुकसान उठाना पड़ा है। नगरीय जैसा विभाग छिनने के बाद भी कोई दूसरा बड़ा महकमा उन्हें नहीं मिला है। जबकि लालसिंह को मुख्यमंत्री के विश्वस्त लोगों में माना जाता है। खैर, यह बंटवारा अब आगे क्या बदलाव दिखाएगा, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा। लेकिन मुख्यमंत्री ने एक बात पूरी तरह से साफ कर दी है कि जो मुश्किलों में सरकार के साथ खड़े होकर काम करेगा, उसे इनाम तो मिलेगा ही। इनाम उनको भी मिलेगा, जिनका काम बेहतर होगा।