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विश्लेषण: MP में परफॉर्मेंस ने बढ़ाया इन मंत्रियों का कद

मुख्यमंत्री ने एक बात पूरी तरह से साफ कर दी है कि जो मुश्किलों में सरकार के साथ खड़े होकर काम करेगा, उसे इनाम तो मिलेगा ही। इनाम उनको भी मिलेगा, जिनका काम बेहतर होगा।

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Anwar Khan

Jul 03, 2016

shivraj singh chouhan

shivraj singh chouhan

शैलेंद्र तिवारी @ भोपाल।
मंत्रिमंडल विस्तार के बाद विभागों का बंटवारा भी कर दिया गया। विभागों के बंटवारे में सभी मंत्रियों के विभागों को बदल दिया गया। इस बदलाव में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक बात के संकेत साफ दे दिए कि बड़े विभाग के मंत्री बने रहने के लिए परफॉर्मेंस भी जरूरी है। यही वजह है कि मुख्यमंत्री के करीब रहकर सरकार के संकट में खड़े होने वाले चारों-पांचों मंत्रियों के कद में जबरदस्त इजाफा किया गया है। वहीं, दूर रहकर तमाशा देखने वालों को झटका लगा है। इस फेरबदल में अगर कोई सबसे फायदे में रहा है तो वो नेता पुत्र रहे, जिन्हें राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार के तौर पर शानदार विभाग आवंटित किए गए।


मंत्रिमंडल विस्तार में मुख्यमंत्री का जो रुख नजर आया था। उसके बाद से ही साफ था कि विभागों के बंटवारे में भी मुख्यमंत्री की पसंद और नापसंद ही महत्वपूर्ण होगी। हालांकि एक दिन पहले मुख्यमंत्री ने विभागों से मंत्रियों के परफॉर्मेंस मांगकर जरूर चौंका दिया था। उसके बाद से साफ था कि मंत्रियों को विभाग उनकी पसंद और नापसंद से नहीं, बल्कि उनके काम के आधार पर ही मिलेंगे। माना जा रहा है कि भूपेंद्र सिंह के परिवहन में किए गए काम को ध्यान में रखकर उन्हें परिवहन के साथ गृह विभाग का भी जिम्मा देकर जबरदस्त कद बढ़ाया गया। वहीं, सरकार के दूसरे संकटमोचक नरोत्तम मिश्रा के कद में भी बड़ा इजाफा किया गया है। उन्हें संसदीय कार्यमंत्री के साथ जल संसाधन और जनसंपर्क विभाग थमाकर मुख्यमंत्री ने अपना राजनीतिक संकेत साफ दे दिया।


राजेंद्र शुक्ल को बिजली विभाग में बेहतर काम का इनाम उद्योग और खनिज के साथ मिला है। हालांकि बिजली उनसे लेकर पारस जैन को थमा दी गई। पारस जैन के लिए भी यह बंपर बोनस से कम नहीं है। हालांकि राजेंद्र शुक्ल बिजली, जनसंपर्क और नरोत्तम स्वास्थ्य विभाग छोडऩे के लिए मुख्यमंत्री को पहले ही बोल चुके थे। राजेंद्र शुक्ल के बाद अगर माया सिंह के कद में भी इजाफा किया गया है। उन्हें महिला बाल विकास से सीधे नगरीय प्रशासन में भेज दिया गया। यह दोनों मंत्री आने वाले दिनों में प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण हैं। दरअसल, आने वाले दिनों में मेट्रो, स्मार्ट सिटी का काम और इन्वेस्टर्स समिट प्रस्तावित है। रामपाल सिंह को भी मुख्यमंत्री से करीबी का फायदा पीडब्ल्यूडी के तौर पर मिला है। वहीं, सबसे ज्यादा फायदे में नेता पुत्र रहे हैं। दीपक जोशी (कैलाश जोशी), सुरेंद्र पटवा (सुंदरलाल पटवा), विश्वास सारंग (कैलाश सारंग) को उम्मीद से ज्यादा मिला है। तीनों राज्यमंत्रियों को एक से दो बड़े विभागों में स्वतंत्र प्रभार देकर मुख्यमंत्री ने पुराने दिग्गजों को साधने का प्रयास किया है। इसके पीछे कहीं न कहीं कोशिश बाबूलाल गौर और सरताज सिंह से होने वाले नुकसान की भरपाई करना भी माना जा रहा है।


जिन मंत्रियों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है, उनमें यशोधरा राजे सिंधिया शामिल हैं। उनसे उद्योग विभाग छीन लिया है। यह शायद पहला ऐसा मौका होगा, जब कोई अफसर मंत्री पर भारी पड़ गया। सुलेमान से लड़ाई का नुकसान यशोधरा को भुगतना पड़ा है। वहीं, बड़ा झटका वित्त मंत्री जयंत मलैया को भी लगा है। उनसे मलाईदार विभाग जलसंसाधन छीन लिया गया है। जबकि वह वित्त विभाग छोडऩे के लिए मुख्यमंत्री को कई दफा बोल चुके थे। इसे मलैया के घटते कद से जोड़कर देखा जा रहा है। इतना ही नहीं, मुख्यमंत्री के करीबी भूपेंद्र सिंह से लड़ाई का नुकसान गोपाल भार्गव को भी झेलना पड़ा है। उनसे सहकारिता जैसा बड़ा विभाग कम कर लिया गया। विजय शाह को भी मुख्यमंत्री से दूरियों के चलते नुकसान उठाना पड़ा है। उन्हें खाद्य से हटाकर स्कूल शिक्षा में भेज दिया गया है। अगर कोई फैसला आश्चर्यजनक माना जा रहा है तो वह लालसिंह आर्य का है। जिन्हें विस्तार में कैबिनेट मंत्री के तौर पर देखा जा रहा था। लेकिन वहां झटका मिलने के बाद यहां भी नुकसान उठाना पड़ा है। नगरीय जैसा विभाग छिनने के बाद भी कोई दूसरा बड़ा महकमा उन्हें नहीं मिला है। जबकि लालसिंह को मुख्यमंत्री के विश्वस्त लोगों में माना जाता है। खैर, यह बंटवारा अब आगे क्या बदलाव दिखाएगा, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा। लेकिन मुख्यमंत्री ने एक बात पूरी तरह से साफ कर दी है कि जो मुश्किलों में सरकार के साथ खड़े होकर काम करेगा, उसे इनाम तो मिलेगा ही। इनाम उनको भी मिलेगा, जिनका काम बेहतर होगा।

shailendra.tiwari@epatrika.com

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