
Warren Buffett Mind Fitness|फोटो सोर्स – Patrika.com
Healthy Brain Tips: 90 की उम्र पार करने के बाद जहां ज्यादातर लोग आराम की ज़िंदगी चुन लेते हैं, वहीं Oracle of Omaha Warren Buffett आज भी अरबों डॉलर के फैसले ले रहे हैं।Berkshire Hathaway को एक्टिवली मैनेज करना और बड़े-बड़े डील्स साइन करना उनकी शार्प सोच को दर्शाता है।हैरानी इस बात की नहीं कि वे कितने अमीर हैं, बल्कि यह है कि इस उम्र में भी उनका दिमाग कंप्यूटर जैसी रफ्तार से काम करता है।न कोई महंगे सप्लीमेंट्स, न ही जटिल माइंड हैक्स फिर भी उनका फोकस, क्लैरिटी और डिसीजन-मेकिंग कमाल की है।सालों की रिसर्च के बाद सामने आते हैं उनके ऐसे माइंड-फिटनेस सीक्रेट्स, जिन्हें कोई भी अपनाकर दिमाग को लंबे समय तक फिट रख सकता है।
वॉरेन बफेट पढ़ने को दिमाग के लिए ऑक्सीजन जैसा मानते हैं। वे रोज़ घंटों किताबें, अखबार और बिजनेस रिपोर्ट पढ़ते हैं। उनका मानना है कि ज्ञान एक दिन में नहीं, बल्कि रोज थोड़ा-थोड़ा करके जमा होता है बिलकुल कंपाउंड इंटरेस्ट की तरह। नियमित पढ़ाई से सोच गहरी होती है, जिज्ञासा बनी रहती है और उम्र के साथ आने वाली मानसिक सुस्ती दूर रहती है।
बफेट जानबूझकर अपने दिन को मीटिंग्स से नहीं भरते। वे अपने लिए सोचने, पढ़ने और बिना दबाव के फैसले लेने का समय निकालते हैं। लगातार बिजी रहना दिमाग को थका देता है, जबकि खाली समय नए आइडिया और बेहतर फैसलों की जगह बनाता है। जब दिमाग को सांस लेने का मौका मिलता है, तभी स्पष्टता आती है।
वॉरेन बफेट उन्हीं कामों में हाथ डालते हैं जिन्हें वे अच्छी तरह समझते हैं। हर चीज जानने की कोशिश दिमागी ऊर्जा को बिखेर देती है। उनका मानना है कि यह जानना ज्यादा जरूरी है कि हमें क्या नहीं आता। इससे गलत फैसले कम होते हैं और दिमाग अनावश्यक तनाव से बचा रहता है।
अरबों की दौलत होने के बावजूद बफेट बेहद सादा जीवन जीते हैं। कम ज़रूरतें और कम दिखावा उन्हें फालतू तनाव से दूर रखता है। जब जीवनशैली को बनाए रखने की चिंता नहीं होती, तो दिमाग ज्यादा आज़ाद महसूस करता है। सादगी मानसिक शांति और बेहतर फोकस देती है।
बफेट ज्यादातर ऑफर्स को ठुकरा देते हैं। हर बार “हां” कहने से जिम्मेदारियां बढ़ती हैं और दिमाग पर बोझ पड़ता है। सही समय पर “ना” कहना मानसिक ऊर्जा बचाता है और ध्यान उन चीजों पर केंद्रित रखता है जो सच में मायने रखती हैं।
वे ऐसे लोगों के साथ रहना पसंद करते हैं जो उनकी हर बात से सहमत नहीं होते, बल्कि ईमानदारी से सच बोलते हैं। सवाल पूछने और आलोचना करने वाले लोग सोच को तेज करते हैं। ऐसी संगत दिमाग को सतर्क रखती है और आत्ममुग्धता से बचाती है।
ब्रिज जैसे खेल बफेट के लिए सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि दिमाग की एक्सरसाइज हैं। ये खेल सोचने की क्षमता, याददाश्त और सामाजिक जुड़ाव को मजबूत करते हैं। सीख यही है कि दिमाग को खुश रखकर ही लंबे समय तक तेज रखा जा सकता है।
Updated on:
20 Jan 2026 04:13 pm
Published on:
20 Jan 2026 04:11 pm

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