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रिलायंस जियो ने की PM मोदी को ‘ब्रेंड एम्बेसेडर’ बनाने की ‘हिमाकत’, लेकिन जुर्माना होगा सिर्फ 500 रूपए !

इस तरह की गतिविधि में शामिल होने वाले पर 'प्रतीक और नाम का अनुचित प्रयोग' को लेकर बने कानून के उल्लंघन का मामला बनता है। यदि रिलायंस पर कार्रवाई होती है तो उससे महज़ 500 रूपए तक का ही जुर्माना वसूला जा सकता है।

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Nakul Devarshi

Dec 03, 2016

देश भर के प्रमुख समाचार पत्रों और टीवी चैनल्स पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर प्रयोग कर विज्ञापन जारी करने के मामले रिलायंस कंपनी एक बार फिर सुर्ख़ियों में है। माना जा रहा है कि रिलायंस पर ऐसा करने के चलते कार्रवाई के तहत जुर्माना वसूला जा सकता है। गौरतलब है कि रिलायंस ने जियो की लॉन्चिंग के समय प्रधानमंत्री की तस्वीर के साथ कई प्रतिष्ठित अखबारों के मुख्य पृष्ठ पर फुल पेज विज्ञापन दिए थे।

लेकिन इस बीच सबसे चौंकाने वाली बात ये सामने आ रही है कि यदि रिलायंस पर कार्रवाई होती है तो उससे महज़ 500 रूपए तक का ही जुर्माना वसूला जा सकता है। दरअसल, इस तरह की गतिविधि में शामिल होने वाले पर 'प्रतीक और नाम का अनुचित प्रयोग' को लेकर बने कानून के उल्लंघन का मामला बनता है।

सरकार की तरफ से गुरुवार को सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने लिखित जवाब देते हुए कहा, 'विज्ञापन में पीएम मोदी की तस्वीर के प्रयोग को लेकर किसी तरह की अनुमति नहीं ली गई थी। '' हालांकि इस बारे में रिलायंस जियो की तरफ से अभी तक किसी तरह का जवाब नहीं आया है।

समाजवादी पार्टी सांसद नीरज शेखर के एक सवाल में पूछा कि आखिर एक निजी कंपनी कैसे प्रधानमंत्री की तस्वीर का प्रयोग कर विज्ञापन दे सकती है। विपक्ष ने रिलायंस जियो की ही तरह पेटीएम कंपनी के विज्ञापन पर भी पीएम मोदी की तस्वीर का प्रयोग किये जाने पर सवाल उठाये।

सांसद शेखर ने यह भी जानना चाहा कि आखिर पीएम की तस्वीर बिना अनुमति के विज्ञापन में अंकित करने को लेकर कानूनी तौर पर सज़ा का क्या प्रावधान है? सांसद ने पूछा की यदि पीएमओ को बिना अनुमति से जारी हुए ऐसे विज्ञापनों के बारे में जानकारी थी तो कंपनी के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई?

सांसद के सवाक के जवाब में केंद्रीय राज्य मंत्री राठौड़ ने कहा, ''प्रतीक और नाम का अनुचित प्रयोग करने पर इससे सम्बंधित कानून बना हुआ है और इसका उल्लंघन करने पर उपभोक्ता मामलात मंत्रालय कार्रवाई करता है। लेकिन मंत्रालय को अब तक इस सिलसिले में कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। ''

राठौड़ ने सदन में बताया सरकार की नीतियो और कार्यक्रमों के लिए मंत्रालय की मीडिया शाखा डीएवीपी काम करती है। यह शाखा केवल सरकारी विज्ञापनों के लिए काम करती है, न कि निजी विज्ञापनों के लिए।

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