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अपने आशियाने की कुंडली पर महंगाई का राहू

रेत, ईंट व गिट्टी निर्माण सामाग्री के बढ़ते दामों से घरौंदा बनाना हुआ मुश्किल

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आगर मालवा. हर व्यक्ति का एक सपना होता है कि उसका भी स्वयं का एक घर हो लेकिन इन दिनों आम व्यक्ति के यह सपने चकनाचूर होते हुए दिखाई दे रहे है। मकान निर्माण सामग्री में आई तेजी से कई लोगो का बजट गड़बड़ा चुका है। एक वर्ष पूर्व जहां स्थानीय स्तर पर मकान निर्माण का खर्च ७०० से ८०० रुपए पर वर्गफीट आता था, वही खर्चा अब बढ़कर ११००-१२०० रुपए तक जा पहुंचा है। ऐसी दशा में बजट गड़बड़ हो जाने पर कई लोगो ने तो अपने मकानों के एस्टीमेट ही बदलकर कम कर दिए।
पिछले ३-४ महीनों में निर्माण सामग्री में आ रही तेजी का असर अब धरातल पर निर्माण कार्यों में दिखाई देने लगा है। हर तरह की निर्माण सामग्री के भाव तेजी के साथ बढ़ रहे हैं। सरिया-सीमेंट तो महंगा हो ही चुका है। साथ ही प्राकृतिक नदी की रेत, ईंट, गिट्टी भी अब महंगी हो चुकी हैं। मजदूरी एवं मिस्त्री के रेट में भी आंशिक बढ़ोतरी हुई है। इसके कारण निर्माण कार्यो के लिए बनाए गए बजट अब बिगड़ते हुए दिखाई दे रहे है। हालांकि बैंकां द्वारा होम लोन की प्रक्रिया में सरलीकरण किए जाने से लोगों को मकान बनाने में तो कोई खास आर्थिक परेशानी नहीं आ रही है लेकिन जिस एस्टीमेट के आधार पर मकान की नींव रखी जा रही थी वह एस्टीमेट जरूर लोगोंका गड़बड़ हुआ है।
किसी ने शुरुआत में दो मंजीला मकान बनाने का निर्णय लिया तो उसने प्रथम मंजील पर ही काम रोककर अपने आपको संतुष्ट कर लिया।
१००० रुपए टन थी बालू रेत, अब १८०० रु.
मकान निर्माण सामग्री में सबसे अहम उपयोगी सामग्री के रूप में बालू रेत आती है। मकान की फिनिशिंग व अन्य कार्य बालूरेत के माध्यम से ही होते है। बालू रेती अब आम लोगों की पहुंच से दूर होती जा रही है। एक वर्ष पहले बालू रेत आसानी से आगर में ११०० से १२०० रुपए टन उपलब्ध हो जाया करती थी लेकिन अब यही रेत १८०० से १९०० रुपए टन हो चुकी है और उपलब्ध भी नहीं हो पा रही है। बताया जाता है कि राजस्थान में रेत खनन पर लगे प्रतिबंध के बाद इस प्रकार की स्थिति निर्मित हो रही है।
बढ़ रहे दाम


राजस्थान के पीड़ावा व अन्य सीमावर्ती शहरों कुछ लोगो ने बालू रेत का स्टॉक कर रखा है और रात के अंधेरे में गिने-चुने व्यापारियों के यहीं रेत पहुंचाई जा रही है जिसके कारण शहर में बालू रेत की एक ट्राली ८ से ९ हजार रुपए के बीच बिक रही है। जबकि यही ट्राली एक वर्ष पहले ४००० से ४५०० रुपए में आसानी से मिल जाया करती थी। जब इस संबंध में राजस्थान के एक बालू रेत सप्लायर से चर्चा की गई तो उन्होने बताया कि हमारे यहां खनन पर प्रतिबंध लगा हुआ है लेकिन हमारे पास स्टॉक माल है पर आगर में रेती भेजना बहुत मुश्किल हो चुका है। यदि ट्रक सुबह ५ बजे भी आगर में प्रवेश करता है तो आगर पुलिस ट्रक को रोक लेती है। हम लोग वहां की पुलिस से परेशान हो चुके है।
व्यापार में भी आई गिरावट


स्थानीय बिल्डिंग मटेरियल सप्लायर अखिलेश अग्रवाल सहित अन्य व्यापारियों से जब इस संबंध में चर्चा की गई तो उन्होने बताया कि एक वर्ष पूर्व सभी निर्माण सामग्री में तेजी आने के कारण व्यापार मे भी गिरावट हुई है। मध्यमवर्गीय परिवारों क बजट प्रभावित हुआ है। जो सामग्री आवश्यक है उसी के भाव आसमान छू रहे है।ं बालू रेती अब आसानी से मिल नही रही है जिससे कई मकानो के निर्माण कार्य रुक चुके हैं।

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