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भोपाल. तीन दिन में ठीक होने वाला वायरल फीवर इस साल आठ से दस दिन ले रहा है। वायरस बोन मैरो पर अटैक कर रहा है। अस्पतालों में रोजाना 40 से 50 मरीज आ रहे हैं।
डॉक्टरों का तर्क है कि इस बार फ्लू का जिस तरह का ट्रेंड दिख रहा है,वो सामान्य नहीं है। वजह नए टाइप के वायरस का हमला हो सकता है। आए बदलाव की वजह जानने मेडिकल कॉलेजों में रिसर्च होती रहती है। लगातार अंतराल में फ्लू का ऐसा असर देखा जाता है, लेकिन हर बार इसके वायरस नए रूप में सामने आते हैं। माइक्रोबायलॉजिस्ट के अनुसार इसकी दो बड़ी वजह सामने आ रही हैं। मरीज का देरी अस्पताल पहुंचना और वायरस के कैरेक्टर में आया बदलाव।
कमर और रीढ़ की हड्डी पर असर
डॉ. आदर्श वाजपेयी बताते हैं कि वायरल के साथ कमर व पीठ के दर्द के मरीज आ रहे हैं। बुखार दस में ठीक हो जाता है, लेकिन दर्द15 से 20 दिन तक परेशान कर रहा है। नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. के के अग्रवाल के मुताबिक पिछली बार वायरस का असर आंखों पर ज्यादा था।
वायरल के लक्षण
बुखार का बहुत तेज और फि र कुछ देर के लिए कम होना
शरीर में अत्यधिक थकान
मांसपेशियों, जोड़ों में दर्द
अत्यधिक ठंड लगना
उलटी होना, नाक का बंद होना, खांसी, सिरदर्द, दस्त और शरीर पर चकत्ते आना
वायरस लगातार अपना कैरेक्टर बदलता रहता है, उसके प्रति प्रतिरोधक क्षमता नहीं होने से वह खतरनाक हो जाता है। इसे वायरस का म्यूटेशन कहते हैं। हाइ रिस्क मरीजों को विशेष ध्यान देना चाहिए।
डॉ. दीपक दुबे, पूर्व एचओडी, माइक्रोबायोलॉजी विभाग, गांधी मेडिकल कॉलेज
मरीजों की संख्या में हो रहा इजाफा
मौसम में आए बदलाव की वजह से राजधानी में वायरल फीवर से ग्रसित मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। सरकारी अस्पतालों की ओपीडी में रोजाना बड़ी संख्या मे मरीज पहुंच रहे हैं जो वायरल से पीडि़त हैं। खास बात है कि परिवार के किसी सदस्य के इस बीमारी से पीडि़त होते ही इससे अन्य मरीजों के ग्रसित होने की आशंका कई गुना बढ़ जाती है।
Published on:
09 Oct 2018 04:04 am
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