गिलहराज जी महाराज का मंदिर में मौजूद हनुमान जी का गिलहरी स्वरुप उस समय की याद दिलाता है जब वानरों के द्वारा रामसेतु का निर्माण कार्य चल रहा था। तब भगवान हनुमान बड़े बहे पत्थरों से पुल बना रहे थे तभी श्री राम ने कहा कि हनुमान बड़े बड़े पत्थरों से स्वयं पुल बना देंगे तो अन्य देवता जो वानर रूप में मौजूद थे वह इस सेवा से वंचित रह जाएंगे। इसलिए आप विश्राम कर लें प्रभु राम की आज्ञा से हनुमान वहां से गए लेकिन राम कार्य में हनुमान विश्राम नहीं कर सकते थे इसलिए हनुमान गिलहरी का रूप रखकर आये और बालू पर लोट लगाकर बालू के कण छोड़ने का कार्य कराते रहे। लेकिन प्रभु राम ने उन्हें पहचान लिया और उनके गिलहरी स्वरुप को प्यार से अपने हाथ पर बैठकर दुलार किया। आज भी श्री गिलहरी महाराज के शरीर पर जो तीन लकीरें है वह प्रभु श्री राम की उगलियों के निशान के रूप में दिखाई देती हैं।