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मंदिर जहां गिलहरी स्वरूप में हैं हनुमान

आपने हनुमान जी के कई मंदिर देखे होंगे। सबमें एक जैसी ही प्रतिमा स्थापित होती है लेकिन एक मंदिर ऐसा है जहां हनुमान जी गिलहरी स्वरूप में स्थापित हैं।

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Bhanu Pratap Singh

Apr 22, 2016

Hanuman Jayanti

Hanuman Jayanti

अलीगढ़।
प्राचीन प्रसिद्ध आंचल सरोवर के किनारे मौजूद श्री गिलहराज जी महाराज का मंदिर विश्व भर में अनोखा है। यहां भगवान हनुमान गिलहरी के रूप में विराजमान हैं। हनुमान जयंती के दिन यहां देश विदेश से भक्त दर्शन के लिए आते हैं। मान्यता है कि यहां लड्डुओं का भोग लगने से भक्तों के हर संकट दूर हो जाते हैं।


हर बीस मिनट बाद होती है आरती

विश्व भर में अनोखे गिलहराज जी महाराज के इस मंदिर की खास बात यह है कि यहां हर बीस मिनट बाद हनुमान जी की आरती होती है। जिससे मंदिर में आने वाले हर भक्त को आरती में शामिल होने का मौका मिलता है।


लगभग पांच हजार वर्ष पुराना है मंदिर

मंदिर के महंत कौशलनाथ जी बताते हैं कि मंदिर लगभग पांच हजार वर्ष पुराना है। मान्यता है कि श्री गिलहराज जी महाराज के विग्रह रूप की खोज महंत महेंद्र योगी महाराज ने की थी। जो नाथ सम्प्रदाय के परम सिद्ध योगी थे। जिन्हें स्वप्न में श्री हनुमान जी महाराज का साक्षात्कार हुआ था।


द्वापर युग में दाऊजी ने की थी प्रथम पूजा

मान्यता है कि श्री गिलहराज जी महाराज के मंदिर में विराजमान हनुमान जी के गिलहरी रूप की पूजा सबसे पहले भगवान श्री कृष्ण के भाई दाऊजी महाराज ने की थी। सारे विश्व भर में गिलहरी के रूप में हनुमान यही देखने को मिलते हैं।


चोला चढ़ाने से मिलती है मुक्ति

मान्यता है कि श्री गिलहराज जी महाराज के इस मंदिर में विराजमान हनुमान जी के गिलहरी स्वरुप में जो आकृति है उसके एक हाथ में लड्डू व् चरणों में नवग्रह दबे हुए हैं। इसलिए यहां चोला चढ़ाने से नवग्रह से मुख्त मिलती है। इसलिए गिलहराज जी को ग्रह-नर-राज भी कहा जाता है। जिसका अर्थ ग्रहों को हराने वाला है।


ये है मान्यता

गिलहराज जी महाराज का मंदिर में मौजूद हनुमान जी का गिलहरी स्वरुप उस समय की याद दिलाता है जब वानरों के द्वारा रामसेतु का निर्माण कार्य चल रहा था। तब भगवान हनुमान बड़े बहे पत्थरों से पुल बना रहे थे तभी श्री राम ने कहा कि हनुमान बड़े बड़े पत्थरों से स्वयं पुल बना देंगे तो अन्य देवता जो वानर रूप में मौजूद थे वह इस सेवा से वंचित रह जाएंगे। इसलिए आप विश्राम कर लें प्रभु राम की आज्ञा से हनुमान वहां से गए लेकिन राम कार्य में हनुमान विश्राम नहीं कर सकते थे इसलिए हनुमान गिलहरी का रूप रखकर आये और बालू पर लोट लगाकर बालू के कण छोड़ने का कार्य कराते रहे। लेकिन प्रभु राम ने उन्हें पहचान लिया और उनके गिलहरी स्वरुप को प्यार से अपने हाथ पर बैठकर दुलार किया। आज भी श्री गिलहरी महाराज के शरीर पर जो तीन लकीरें है वह प्रभु श्री राम की उगलियों के निशान के रूप में दिखाई देती हैं।


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