जिला पंचायत सदस्य के रूप में भाजपा के सात सदस्य थे। सपा के पास आठ सदस्य थे। सात सदस्यों के बूते भाजपा जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव जीतने के ख्वाब देख रही थी। भाजपा केवल 10 सदस्यों का इन्तजाम कर पाई। इस तरह से 17 वोट मिले। सपा ने 26 सदस्यों का इन्तजाम कर लिया और पांच साल के लिए लाल बत्ती हथिया ली। भाजपाइयों को अपनी हार का भरोसा पहले ही हो गया था, इस कारण मतगणना शुरू होने से पहले अधिकांश भाजपाई कलक्ट्रेट से खिसक लिए थे।