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टोरेंट आगरा ले आया अंधकार युग

भाजपा नेता के नरेन्द्र मोदी को टोरेंट का पार्टनर होने से बताने से उठते विवाद के बीच यह भी सच है कि टोरेंट आगरा को अंधकार युग में ले आया है । आगरा को इनवर्टर का नाम भी भुला देने का वादा करने वाले टोरेंट के हालात यह हैं कि रिकॉर्ड से एक भी दिन ऐसा नहीं गुजरता, जब दो-चार घंटे लाइट नहीं जाती हो ।

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Vikas Kumar

Jun 16, 2016

power cut

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आगरा.
भाजपा नेता प्रमोद गुप्ता के नरेन्द्र मोदी को टोरेंट वालों का मित्र बताने से उठते विवाद के बीच यह भी सच है कि टोरेंट आगरा को अंधकार युग में ले आया है । आगरा को इनवर्टर का नाम भी भुला देने का वादा करने वाले टोरेंट के हालात यह हैं कि रिकॉर्ड से एक भी दिन ऐसा नहीं गुजरता, जब दो-चार घंटे लाइट नहीं जाती हो । मच्छरों से खुजलाते हुए रात भर लोग छतों पर देखे जा सकते हैं । कथित कॉल सेंटर के हालात यह हैं कि 50 बार फोन करने पर भी फोन नहीं लगने की गारंटी है । यदि कभी फोन लग भी गया तो एक ही रटा रटाया बहाना है कि तकनीकी खराबी की वजह से क्षेत्र की आपूर्ति बाधित है और दो, तीन या चार घंटे में लाइट आने की संभावना है । वहीं बिल दो गुना और चार गुना के आने की तो पीड़ा जनता भुगत ही रही है ।


घोषित दरो से भी कम दरो पर दिया गया था ठेका

2009 में तत्कालीन बसपा सरकार ने आगरा की विद्युत वितरण व्यवस्था निजी कम्पनी टोरेंट पॉवर लिमिटेड किये को सौंप दी। आगरा में टोरेंट को बिजली वितरण का ठेका टेंडर में घोषित दरो से भी कम दरो पर दिया गया था। आगरा में बिजली वितरण का कार्य निजी हाथो में देने के लिए टेंडर निकाले गए थे जिनमे आगरा में बिजली आपूर्ति का औसत मूल्य २ .६२ पैसे प्रति यूनिट दर्शाया गया था लेकिन टोरेंट पॉवर से करार होने के समय घोषित मूल्य से काफी कम दरो पर १.४५ पैसे प्रति यूनिट बिजली की दरे स्वीकृत की गयी।


मामला हो गया सैैट


जैसे ही टोरेंट को आगरा की बिजली व्यवस्था सौंपने का निर्णय लिया सभी विपक्षी दलों ने जमकर विरोध शुरू कर दिया। 2012 के चुनावों में सपा प्रत्याशियों ने तो टोरेंट हटाने का भी वादा जनता से किया था । छावनी से प्रत्याशी चंद्रसेन टपलू ने सरकार बनने पर टोरेंट की नाक में नकेल डालने की बात कही थी लेकिन सपा की सरकार आने के बाद मामला सैट हो गया । भाजपा द्वारा इसे जन आन्दोलन बनाने की कोशिश की गयी वही कांग्रेस और सपा ने भी टोरेंट को लेकर कई बड़े प्रदर्शन किये। कई बार दक्षिणांचल और टोरेंट के दफ्तरों पर तालाबंदी और घेराव जैसे प्रदर्शन हुए।


धरे रह गए वादे

टॉरेंट पावर ने सारे खर्चे स्वयं उठाने के साथ वितरण व्यवस्था में सुधार के लिए पहले पांच वर्षों में 150 करोड़ रुपये के निवेश का भी वादा किया था। उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मियों के पुरजोर विरोध के बावजूद कंपनी ने 31 मार्च 2010 की मध्य रात्रि से शहर की बिजली व्यवस्था अपने हाथों में ले लिया था । कंपनी को यह जिम्मेदारी राज्य सरकार की दक्षिणांचल विद्युत निगम लिमिटेड के हाथों से उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड ने सौंपी। साथ ही, उसे जिले के ग्रामीण इलाकों में भी बिजली वितरण का जिम्मा सौंपा गया था।

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