हर वर्ष ताजमहल पर मुग़ल बादशाह शाहजहां का तीन दिवसीय उर्स मनाया जाता है लेकिन जिन पीरों (संतों) की वजह से ताजमहल की नींव रखी गई जिनकी वजह से आज ताजमहल की इमारत कायम है, उन पीरों की दरगाह को हर साल उर्स के मौके पर श्रद्धा और सुविधा से वंचित रखा जाता है। इतना ही नहीं, मान्यता भी ये है कि अगर कोई जायरीन शाहजहां की जियारत करने आया है तो उसे सबसे पहले पीर हजरत अहमद बुखारी की दरगाह पर जाकर माथा टेकना होता है उसके बाद शाहजहां की मजार पर जाना चाहिए लेकिन ताजमहल की चकाचौंध में परंपराओं की अनदेखी की जा रही है।