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आखिर चागोस आइलैंड्स को लेकर ब्रिटेन पर क्यों भड़के ट्रंप? UK-मॉरीशस डील को बताया ‘कमज़ोरी भरा’ कदम

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ब्रिटेन और मॉरिशस के बीच चागोस द्वीप डील की तीखी आलोचना की। ट्रंप ने इसे ‘कमज़ोरी भरा और मूर्खतापूर्ण कदम’ बताया और कहा कि डिएगो गार्सिया जैसे महत्वपूर्ण सैन्य ठिकाने पर नियंत्रण राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अहम है।

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Donald Trump

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Photo Credit - IANS)

ब्रिटेन हिंद महासागर में स्थित चागोस आइलैंड्स को मॉरिशस को देने की तैयारी कर रहा है, जिस पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने नाटो सहयोगी के खिलाफ नाराजगी जताई है। उन्होंने इन द्वीपों को बिना किसी कारण के देने को गलत और मूर्खतापूर्ण फैसला बताया।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने Truth Social पोस्ट में लिखा कि ब्रिटेन हमारे NATO सहयोगी के रूप में डिएगो गार्सिया (Diego Garcia) जैसे महत्वपूर्ण सैन्य ठिकाने को मॉरिशस को सौंपने की योजना बना रहा है, जो एक महत्वपूर्ण अमेरिकी सैन्य ठिकाना है, और वह भी पूरी तरह बिना किसी कारण के।

उन्होंने आगे लिखा कि इसमें कोई शक नहीं कि चीन और रूस ने इस पूरी कमजोरी के क़दम को नोटिस किया है। ब्रिटेन का इतनी महत्वपूर्ण भूमि देना महान मूर्खता है और यह उन कई राष्ट्रीय सुरक्षा कारणों में से एक है जिनकी वजह से ग्रीनलैंड पर कब्जा करना आवश्यक है।

डिएगो गार्सिया क्या है?

डिएगो गार्सिया हिंद महासागर स्थित चागोस आइलैंड्स का हिस्सा है और अमेरिका व ब्रिटेन का एक महत्वपूर्ण सैन्य ठिकाना है। 1965 में ब्रिटेन ने चागोस आइलैंड्स को मॉरिशस से अलग कर ब्रिटिश औपनिवेशिक क्षेत्र घोषित किया था। उस समय द्वीपों के निवासियों (Chagossians) को बलपूर्वक विस्थापित कर दिया गया था।

1968 में मॉरिशस को आज़ादी मिली और तब यह तय हुआ कि जब इन द्वीपों की रक्षा के लिए जरूरत नहीं रहेगी, तब इन्हें मॉरिशस को सौंप दिया जाएगा। बाद में डिएगो गार्सिया पर अमेरिका और ब्रिटेन ने सैन्य आधार स्थापित किया।

मॉरिशस वर्षों से चागोस पर अपनी संप्रभुता का दावा कर रहा है। पिछले साल ब्रिटेन और मॉरिशस के बीच समझौता हुआ, जिसके तहत चागोस आइलैंड्स की औपचारिक संप्रभुता मॉरिशस को दी जाएगी, लेकिन डिएगो गार्सिया पर ब्रिटेन और अमेरिका का 99 साल का सैन्य नियंत्रण बरकरार रहेगा।

ब्रिटेन का कहना है कि यह कदम राष्ट्रीय सुरक्षा और सैन्य संचालन के लिए जरूरी था। खास बात यह है कि पिछले साल अमेरिका ने इसी डील का समर्थन किया था। अब ट्रंप की टिप्पणियों से अमेरिका और ब्रिटेन के रिश्तों में तनाव की आशंका है, खासकर क्योंकि यह टिप्पणियां पहले की अमेरिकी सहमति के विपरीत हैं।