
anudeshak up demand for Permanent
आगरा। शिक्षण कार्य कर रहे अनुदेशक भी अब शिक्षामित्रों जैसे आंदोलन पर उतारू हैं। अनुदेशकों का कहना है कि वे कई सालों में कम मानदेय पर काम रहे हैं। उन्हें अभी तक बढ़ा मानदेय नहीं मिला है। जबकि सरकार ने शिक्षामित्रों का मानदेय बढ़ाने के लिए इतनी जल्दी कैबिनेट में प्रस्ताव पास कर दिया। अंशकालिक अनुदेशकों की आगरा में वैसे तो संख्या कम है, लेकिन वे लखनउ से अपने संगठन के साथ जुड़कर बड़ा आंदोलन करने की तैयारी कर रहे हैं।
2013 में हुई थी नियुक्ति
गौरतलब है कि उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत अंशकालिक अनुदेशकों की नियुक्ति वर्ष 2013 से अंशकालिक अनुदेशकों के पद पर हुई थी। नियुक्ति के बाद से ही अनुदेशकों ने शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाने में अहम भूमिका अदा की। लेकिन, अनुदेशकों को उनके पद पर नियमित नहीं किया गया है। आगरा में अनुदेशक के पद पर काम करने वालों का कहना है कि वे मांग कर रहे हैं कि अनुदेशकों को नियमित करने के साथ ही 25000 प्रति माह वेतन दिया जाए। अनुदेशकों को छात्र संख्या 100 की बाध्यता से मुक्त किया जाए। अनुदेशकों को स्वत: नवीनीकरण की सुविधा प्रदान की जाए। अनुदेशकों को स्थानांतरण की सुविधा प्रदान की जाए। अभी तक न ही समायोजन का प्रत्यावेदन भारत सरकार को भेजा गया न ही अनुदेशकों को स्वत: नवीनीकरण की सुविधा प्रदान की गई। महिला प्रसूति अवकाश की सुविधा दी गई है लेकिन,उसमें भी तीन महीने का मानदेय सरकार नहीं देगी, ऐसे में इस अवकाश का क्या महत्व है। सरकार ने ये घोषणा कर अनुदेशकों के साथ एक मजाक सा किया है।
शिक्षामित्रों के लिए सरकार झुकी, तो उसी राह पर चलेंगे
अनुदेशकों का कहना है कि शिक्षामित्र लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने उनके समायोजन को रद कर दिया है। लेकिन, फिर भी वे प्रदर्शन कर सरकारों पर दबाव बना रहे हैं। इसीका नतीजा है कि सरकार भी झुकी है और उनका मानदेय तुरंत बढ़ा दिया गया। यदि सरकार ने शिक्षामित्रों को स्थाई किया और उन्हें समायोजित कर 39हजार रुपये वेतन दिया तो वे भी इसी राह पर चल कर अपना हक लेकर रहेंगे।
Published on:
12 Sept 2017 12:13 pm
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