
Atal Bihari Vajpayee
आगरा। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के 93 वें जन्मदिन यानि 25 दिसंबर के अवसर पर आपको बताते हैं, कि उनके बारे में अनसुनी एक कहानी। ये कहानी 1942 की, जब अंग्रेजी हुकूमत का बोलबाला था। आजादी की दीवानगी अटल बिहारी वाजपेयी के भी सिर पर चढ़ी हुई थी। अपने पैतृक गांव में उस समय अलट जी थे। वहां उन्होंने वन विभाग की उस कोठरी को तोड़ दिया, जिसमें अंग्रेज अधिकारी बैठते थे। इसके बाद बड़ा बवाल हुआ।
अंग्रजों का था आतंक
गांव के पुछ पुराने बुजुर्ग बताते हैं, कि उस समय अटल बिहारी वाजपेयी की उम्र महज 18 वर्ष की थी। युवा जोश और उत्साह देश की आजादी की लगन में लगा हुआ था। अंग्रजों का अत्याचार बढ़ता जा रहा था। अटल बिहारी वाजपेयी के गांव बटेश्वर में अंग्रजों के वन विभाग के अधिकारियों की एक कोठी थी। उस समय उनका बड़ा आतंक था। उस दौरान लोग खाना बनाने के लिए लकड़ियां जंगलों से लाते थे। अंग्रेज अधिकारी इन लोगों को परेशान करते थे। इस पर अटल बिहारी वाजपेयी ने उन्हें सबक सिखाने की ठान ली और बड़ा कदम उठाया।
तोड़ दी कोठरी
अटल बिहारी वाजपेयी के साथ गांव के दो तीन युवा और भी थे। सबने रात के उस समय इस कोठरी पर धावा बोला, जब अंग्रेज अधिकारी गश्त के लिए गए हुए थे। कुछ ही देर में पूरी कोठीर को धराशाही कर दिया गया। इसी दौरान अंग्रेज अधिकारी वहां आ गए। अटल बिहारी वाजपेयी को इन अधिकारियों ने देख लिया था। कोठरी तोड़ने के आरोप में उन्हें जेल भेज दिया गया। टूटी हुई इस कोठरी की बहुत से अवशेष अभी भी गांव में उस दिन की पूरी कहानी को बयां करते हैं।
ये भी पढ़ें -
Published on:
24 Dec 2017 03:28 pm
बड़ी खबरें
View Allआगरा
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
