
आगरा में मेनोपॉज पर चर्चा को लेकर नॉर्थ जोन कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लेने पहुंची स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ।
North Zone Conference in Agra: उत्तर प्रदेश की ताजनगरी आगरा में 28 अक्टूबर से शुरू हुई नॉर्थ जोन कॉन्फ्रेंस में 11 राज्यों से पहुंची 300 महिला डॉक्टर हिस्सा ले रही हैं। पहले दिन महिलाओं ने मेनोपॉज यानी पीरियड्स बंद होने की बदलती स्थिति पर चर्चा की। यह कॉन्फ्रेंस आगरा में इंडियन मीनोपॉज सोसायटी करवा रही है। इसमें महिला डॉक्टरों ने बताया कि आजकल तनाव और बदलती लाइफस्टाइल से कम उम्र में ही मेनोपॉज हो रहा है। 42 से 45 साल की उम्र में मेनोपॉज की अवस्था में पहुंचने वाली महिलाएं अब 40 से पहले ही इस अवस्था में एंट्री ले रही हैं। इसके अलावा कान्फ्रेंस के पहले दिन ब्रेस्ट कैंसर, प्री मेनोपॉज, यूट्रेस की बिना टांके वाली सर्जरी समेत तमाम ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा की गई।
इससे पहले शनिवार को नॉर्थ जोन इंडियन मेनोपॉज सोसायटी की कॉन्फ्रेंस का उद्घाटन केंद्रीय मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल ने किया। इस दौरान केंद्रीय मंत्री और डॉक्टरों ने सुवेनियर पुस्तक और पॉज मैग्जीन का विमोचन भी किया। इसके बाद दिनभर मरीजों की सेवा में व्यस्त रहने वालीं महिला डॉक्टरों ने शरदोत्सव रास और ‘मैं आगरा हूं’ थीम पर आधारित नृत्य नाटिका की प्रस्तुति दी। रंगारंग उद्घाटन सत्र से पहले कई सत्र रखे गए थे।
जिनमें समय से पूर्व मेनोपॉज, मेनोपॉज की समस्या और समाधान, यूट्रेस और ब्रेस्ट कैंसर के कारण और निवारण पर गंभीर मंथन किया गया। इंडियन मेनोपॉज सोसायटी की राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. पुष्पा सेठी ने बताया जीवनभर परिवार को समय देने वाली महिलाओं के लिए बेहद जरूरी है कि 40 वर्ष की उम्र के बाद खुद के लिए कम से कम 30 मिनट निकालें। व्यायाम करें, साइकिलिंग करें, फिजिकल एक्टिविटी करें और व्यवसनों से सख्त दूरी रखें। मीनोपॉज के दौरान होने वाली समस्याओं से बचाव के ये कुछ गुरुमंत्र साझा किये।
कॉन्फ्रेंस के पहले दिन आगरा मेनोपॉज सोसायटी की अध्यक्ष डॉ. रुचिका शर्मा, डॉ. निधि बंसल, डॉ. अंजू शर्मा और डॉ. अपेक्षा के निर्देशन में 12 पीजी के छात्रों ने शाेधपत्र प्रस्तुत किये। जिनमें आगरा, विजयवाड़ा, मथुरा के छात्र शामिल थे। जिनमें बताया गया कि मीनोपॉज के बाद यदि ब्लीडिंग होती है तो ये कैंसर का एक लक्षण भी हो सकता है। उड़ीसा से आए डॉ. हारा पटनायक और डॉ. श्रेयांश चाहर ने बताया कि पेशाब में जलन या खुजली की समस्या को हार्मोन थैरेपी से सही किया जा सकता है और गर्भाशय कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर के कारण और निवारण पर गंभीर मंथन किया गया।
होटल क्लार्क शिराज में आयोजित नॉर्थ जोन आईएमएसकॉन 2023 शुरू हुई कान्फ्रेंस में स्त्री रोग विशेषज्ञों के अलावा हड्डी रोग, न्यूरो फीजिशियन और यूरो सर्जन, यूरो फिजिशियन और सर्जन, दंत रोग विशेषज्ञ, रेडियोलॉजिस्ट, मनोचिकित्सक आदि 300 डॉक्टर भाग ले रहे हैं। उप्र के अलावा गुजरात, चैन्नई, केरल, तेलंगाना, हरियाणा, पंजाब, जम्मू, दिल्ली, आंध्र प्रदेश, उड़ीसा आदि प्रदेशों से भी डॉक्टर्स पहुंचे हैं। जिसमें मेनोपॉजल हार्मोन थैरेपी, स्क्रीनिंग आदि होंगे। 30 से ज्यादा पीजी छात्र शोध पत्र प्रस्तुत करेंगे। हर रोज पांच पैनल होंगे।
टेक्निकल सत्र में पूर्व अध्यक्ष डॉ. जयदीप मल्होत्रा ने बताया कि मेनोपॉज के बाद बहुत बार महिलाओं की याददाश्त पर गहरा असर पड़ता है। जब समस्या बढ़ जाती है और जीवन में एकाकीपन अधिक होता है तो ये अल्जाइमर का रूप ले लेता है। मेनोपॉज हार्मोन थैरेपी से समय रहते इलाज संभव है। यूरिन इंफेक्शन अगर जल्दी-जल्दी हो रहा है तो इसे हल्के में न लें। यह मेनोपॉज का एक लक्षण हो सकता है।
इंडियन मेनोपॉज सोसायटी की अध्यक्ष डा. पुष्पा सेठी ने कहा कि मेनोपॉज के दौरान होने वाली समस्याओं से बचने के कुछ गुरुमंत्र हैं। 40 साल के बाद खुद पर हर रोज 30 मिनट जरूर खर्च करें। व्यायाम करें, साइकिलिंग करें, फिजिकल एक्टिविटी करें। डॉक्टर्स ने जानकारी दी कि तनाव के कारण महिलाओं का सिस्टम बदल रहा है। वे प्री मेनोपॉज की अवस्था में आ जाती हैं। वजन बढ़ जाता है, हार्मोनल बदलाव आते हैं। इस समय महिलाओं को अपने परिवार के साथ की सबसे ज्यादा जरूरत होती है क्योंकि शारीरिक के साथ ही मानसिक बदलाव भी आता है।
बड़ाेदरा से आईं पब्लिक अवेयरनेस कमेटी की अध्यक्ष डॉ. बीनल शाह ने बताया कि मेनोपॉज के बाद महिलाओं में सबसे ज्यादा आस्टियोपोरोसिस की समस्या यानि हड्डियों का कमजोर होना बहुत अधिक होती है। लापरवाही के कारण कैंसर से अधिक महिलाओं की मौत आस्टियोपोरोसिस के कारण होती है। इसलिए समय रहते 40 वर्ष की उम्र के बाद से ही आहार में कैल्शियम की मात्रा बढ़ा देनी जरूरी है।
ताकि जब मेनोपॉज के बाद शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन बनना बंद हो तो कैल्शियम बैंक शरीर में पहले से हो। इसके अलावा मिलेट्स भी आहार में अवश्य शामिल करें और सूर्य नमस्कार, धूप में बैठने को दिनचर्या का हिस्सा बना लें। एंस्ट्रोजन हॉर्मोन की कमी के कारण महिलाओं में हृदयाघात भी अधिक होता है। इस अवसर पर सोसायटी की चैयरपर्सन डॉ. आरती मनोज, डॉ. सुभाषिनी गुप्ता, सचिव डॉ. रत्ना शर्मा, डॉ. निधि बंसल, सह-चेयरपर्सन डॉ. रिचा सिंह आदि उपस्थित रहीं।
Updated on:
29 Oct 2023 02:21 pm
Published on:
29 Oct 2023 02:20 pm
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