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खुद करें ब्रेस्ट कैंसर की जांच डॉक्टर ने बताए लक्षण

ब्रेस्ट कैंसर की पहली स्टेज में ब्रेस्ट कंजर्विंग सर्जरी से बचाया जा सकता ब्रेस्ट, क्लब 35 प्लस द्वारा होटल क्लार्क शीराज में आयोजित की गई कार्यशाला,

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आगरा

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Abhishek Saxena

Sep 06, 2017

health

आगरा। शर्म के चलते ब्रेस्ट कैंसर के लक्षणों को नजरअंदाज करने का नतीजा है कि भारत में इससे होने वाली मौतों का ग्राफ अधिक है। डॉक्टर तो दूर घर के किसी सदस्य भी महिलाएं झिझक के चलते इस विषय पर चर्चा नहीं करती। जबकि ब्रेस्ट कैंसर का पता पहली स्टेज में चल जाए तो इसके 90 फीसदी तक ठीक होने की सम्भावना होती है।

डॉ.शैफाली ने दी जानकारी
दिल्ली अपोलो की सर्जिकल ओंकोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. शैफाली अग्रवाल ने क्लब 35 प्लस द्वारा क्लार्क शीराज में आयोजित कार्यशाला में ये जानकारी दी। उन्होंने कहा कि जितनी जल्दी कैंसर की पहचान होगी, इलाज उतना ही सरल, सस्ता, छोटा और सफल होगा। ब्रेस्ट कंजर्विंग सर्जरी के बारे में जानकारी देते हुए डॉ. शैफाली ने बताया कि अगर कैंसर का पता पहली स्टेज में लग जाता है और महिला ब्रेस्ट नहीं निकलवाना चाहती तो ब्रेस्ट कंजर्विंग सर्जरी मददगार होती है।

मरीज के ठीक होने की संभावनाएं बढ़ी
डॉ. जयदीप मल्होत्रा ने बताया कि आज कैंसरों में स्तन कैंसर सबसे सामान्य हो गया है। स्तन कैंसर अगर पहली स्टेज में है तो मरीज के ठीक होने की उम्मीद 90 प्रतिशत तक होती है। दूसरी स्टेज में पता चलने पर 60 से 70 प्रतिशत तक महिलाएं ठीक हो जाती हैं। वहीं तीसरे या चौथे स्टेज में स्तन कैंसर है तो इलाज थोड़ा मुश्किल हो जाता है। इसलिए सही समय पर डॉक्टर के पास जाना बेहतर होता है। इस अवसर पर ईको फ्रेंड्स वेलफेयर सोसायटी की सदस्याओं रेका व डॉ. मनिन्दर ने रसोई के कचरे से जैविक खाद बनाने की विधि समझाई। सभी सदस्याओं का स्वागत क्लब की कोआर्डिनेटर अशु मित्तल ने किया। इस अवसर पर मोनिका अग्रवाल, मीनाक्षी मोहन, पेमिला कपूर, सविता जैन, मयूरी मित्तल आदि मौजूद थीं।

खुद जानें
-अपनी गाइनेकोलॉजिस्ट से घर में ब्रेस्ट परीक्षण की सही तकनीक सीखें। इसे आप इंटरनेट या यू ट्यूब से भी सीख सकती हैं।
-20 से 40 साल की उम्र के दौरान हर साल डॉक्टर के पास जाकर एक बार जांच अवश्य कराएं, ताकि ब्रेस्ट कैंसर या इसके होने की संभावना का पता जल्द चल सके। वहीं 45 साल की उम्र के बाद हर साल मैमोग्राम अवश्य कराएं।
-स्तन में गांठ, जिसमें दर्द हो।
-स्तनों में किसी प्रकार का ऐसा बदलाव, जिसे देखकर आपको लगे कि शायद आपको डॉंक्टर की मदद लेनी चाहिए।
-स्तनों का जरूरत से ज्यादा कठोर होना।
-स्तनों में बेवजह दर्द होना। निप्पल में से तरल पदार्थ का स्त्राव होना।
-आकार में परिवर्तन या जलन होना।
-हर माह मासिक धर्म के एक सप्ताह के बाद अपने ब्रेस्ट की स्वयं जांच करें।

रेनबो में हुई नि:शुल्क ओपीडी
ब्रेस्ट कैंसर के प्रति जागरूकता और इसकी रोकथाम के लिए रेनबो हॉस्पिटल में सुपरस्पेशियलिटी ओपीडी आयोजित की गई। यहां निशुल्क ओपीडी के साथ डॉ. शैपाली ने डॉक्टर्स और पैरामेडिकल स्टॉफ को कैंसर के लक्षण, इलाज और बचाव पर जानकारी भी दी।

शिक्षकाओं का किया सम्मान
कार्यक्रम में सेंट पीटर्स की शिक्षकाओं नीलम मल्होत्रा व गीती माहेश्वरी का पौधे प्रदान कर शिक्षक दिवस के मौके पर सम्मान भी किया गया।

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