कोई लड़ाई झगड़ा नहीं था, बल्कि एक बालिका की अस्मत का सवाल था, फिर भी पुलिस इस मामले में कार्रवाई करने के बजाए, राजीनामा में जुट गई। सूत्रों की मानें तो थाने के एक दरोगा ने स्थानीय सपा नेताओं के साथ मिलकर इस मामले में राजीनामा करा दिया। पीडित पक्ष पर इसके लिए पुलिस ने दबाव बनाया। इस मामले में जब एसओ जगदीशपुरा तेजबहादुर सिंह से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि बालिका के दादा का आरोप था। बाद में दादा खुद ही अपनी शिकायत वापस लेकर चला गया।