देखरेख के अभाव में ईदगाह मस्जिद बेकार हो गई थी। सन 1876 ईसवी में रामपुर के नवाब अली खां ने इसकी मरम्मत कराई। फिर 1940 ईसवी में केन्द्रीय लोक निर्माण विभाग ने ईदगाह के उत्तरी भाग की मरम्मत कराई। छत की मरम्मत में तब 11,574 रुपये खर्च हुए थे। ईदगाह के बाहर खुला मैदान है। इसकी दीवारें इतनी ऊंची हैं कि पास से देखने के लिए सिर ऊंचा करना पड़ता है।