जवाहर लाल नेहरू भ्रष्ट थे, गांधी जी मुसलमानों के आगे झुकते थे, मोदी कुल मिलाकर ठीक

जवाहर लाल नेहरू भ्रष्ट थे, गांधी जी मुसलमानों के आगे झुकते थे, मोदी कुल मिलाकर ठीक
chimmanlal jain

Dhirendra yadav | Updated: 14 Aug 2019, 05:34:54 PM (IST) Agra, Agra, Uttar Pradesh, India

-स्वतंत्रता संग्राम सेनानी चिम्मनलाल जैन ने कही खरी-खरी

-आजादी के बाद 90 फीसदी नेता भ्रष्ट हो गए

-भ्रष्टाचार खत्म नहीं हो सकता, जो कहता है वह अहंकारी

-जम्मू एवं कश्मीर से धारा 370 बहुत पहले हट जानी चाहिए थी

डॉ. भानु प्रताप सिंह
आगरा। आप संजय प्लेस से घटिया चौराहे पर पहुंचे। वहां से पथवारी मंदिर के बाईं ओर घूम जाएं। थोड़ा से आगे जाने पर ही दो मंजिला भवन है। इसके बाहर लाल रंग की कार खड़ी रहती है। इस पर लिखा है- शराब हटाओ- देश बचाओ। जो शराब बंदी की बात करेगा, वही देश पर राज करेगा। दूसरी मंजिल पर एक कमरे में पहुंचे। वहां चिम्मन लाल जैन मिले। वे तख्त पर लेटे हुए थे। वस्त्र नहीं पहने थे। यूं तो सावन का महीना है, लेकिन गर्मी सता रही थी। पंखे से गर्मी दूर नहीं होती है। उनके सेवा में दो लोग रहते हैं। सामान्य बातचीत के बाद उन्होंने बाबा (उन्हें सब बाबा कहते हैं) को कुर्ता पहनाया। गांधी टोपी पहनाई। उठाकर बैठा दिया। चिम्मनलाल जैन की उम्र 100 साल आठ माह है। सामान्य बातचीत में उनके मुंह से 108 साल निकल गया। वे पूरी तरह चैतन्य हैं। स्मृति तरोताजा है। शारीरिक रूप से अशक्त हो गए हैं, लेकिन जोश पहले जैसा ही है। पैर की हड्डी टूटने के बाद स्वयं चल नहीं पाते हैं। देश, समाज और नेताओं पर बेबाक राय रखते हैं।

जब हमने बताया कि पत्रिका से आए हैं तो मुस्करा उठे। कहा कि पत्रिका ने शराबबंदी आंदोलन के दौरान गोष्ठी कराई थी। सामान्य परिचय के बाद हमने बातचीत शुरू की। चिम्मनलाल जैन कहते हैं कि आजादी की आधी लड़ाई जनता ने और आधी गांधीजी ने लड़ी थी। साफ कहा कि प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू भ्रष्ट था। नरेन्द्र मोदी को कुल मिलाकर ठीक बताया। यह भी कहा कि महात्मा गांधी (मोहनदास करमचंद गांधी) मुसलमानों के आगे झुकते थे।प्रस्तुत हैं बातचीत के मुख्य अंश-

पत्रिकाः आजादी पाने का मुख्य उद्देश्य क्या था?

चिम्मनलाल जैनः गांधी जी ने सब लोगों के दिमाग में यह बात बैठा दी थी कि सबसे बुरी चीज गुलामी है। पहले हमें आजाद होना है। गांधी जी मुसलमानों से हर बात पर झुकते थे। वे चाहते थे कि लड़ाई एक ही जगह हो। मोहम्मद अली जिन्ना इस बात में कामयाब हो गया कि मुसलमान माने पाकिस्तान और हिन्दू माने हिन्दुस्तान। जिन्ना ने गांधीजी को लड़ने नहीं दिया। अंग्रेजों के साथ मिला। अंग्रेजों का उस पर पूरा हाथ था।

 

पत्रिकाः तो क्या गांधी जी की कमी के कारण पाकिस्तान बना?

चिम्मनलाल जैनः नहीं, उस वक्त का माहौल ऐसा था कि हिन्दू हर जगह दबोचा जा रहा था। हिन्दू के मन में बडी़ वेदना था कि कैसे आजाद होंगे।

 

पत्रिकाः आजादी के आंदोलन में आपकी भूमिका क्या थी?

चिम्मनलाल जैनः हम तो 22-23 साल के थे। हम अंधे होकर गांधी ने जो कह दिया, वह करने को तैयार रहते थे।

tiranga on hundred feet

पत्रिकाः आगरा में क्या किया?

चिम्मनलाल जैनः आगरा में हमने बम के लिए बारूद दिया। बारूद भंडार था हमारे पास। हमारे मामा के पास पहाड़ था। उसे तोड़ने में बारूद का उपयोग होत था। हम वहां से लाते थे।

 

पत्रिकाः आजाद और गुलाम भारत में क्या अंतर महसूस होता है?

चिम्मनलाल जैनः आजादी के बाद जितने नेता बने, वे अधिकांशत आईसीएस ऑफीसर के गुलाम हो गए, क्योंकि वही सरकार चला रहे थे। 90 परसेंट भ्रष्ट हो गए।

 

पत्रिकाः आपने शराब बंदी के लिए आंदोलन किया, लेकिन कुछ हो नहीं पाया।

चिम्मनलाल जैनः जो काम सरकार करेगी, उसे हम कैसे रोक सकते हैं। सरकार में शक्ति है। शराब बंदी के लिए हमने पांच बार मरने का प्रयत्न किया। कलक्टर की कोठी के सामने पेड़ पर फांसी देने, रेल के सामने कूदने, यमुना में जलसमाधि लेने का प्रयास किया। हमारी चली नहीं।

mahatma ghandhi

पत्रिकाः जम्मू एवं कश्मीर से धारा 370 हटाने पर क्या कहना है?

चिम्मनलाल जैनः बहुत पहले हो जाना चाहिए था। देर हुआ दुरुस्त हुआ।

 

पत्रिकाः पंचायतों को आज भी अधिकार नहीं मिले हैं, आप क्या कहते हैं?

चिम्मनलाल जैनः गांधी जी ने लिखा है कि ग्राम सभा और समितियों को वे अधिकार होंगे, जो दिल्ली में प्रधानमंत्री को होते हैं। जवाहर लाल नेहरू बेईमान थे, उन्होंने गांधी जो को धोखा दिया और माउंटबटेन के कहने पर हस्ताक्षर कर दिए।


पत्रिकाः प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बारे में क्या सोचते हैं?

चिम्मनलाल जैनः कुल मिलाकर समय के अनुसार ठीक है। देश की हालत में सुधार आ रहा है।

narednra modi

पत्रिकाः क्या आपको देश, समाज और सरकार से वो सम्मान मिला, जिसके हकदार हैं।

चिम्मनलाल जैनः हम तो पददलितों में रहे। वे सारी पेरशानियां जीवन में आईं जो मामूली आदमी को होती हैं, बल्कि उससे अधिक रहीं।

 

पत्रिकाः आर्थिक स्थिति कैसी रही

चिम्मनलाल जैनः इतनी खराब थी कि उसका क्या वर्णन करें?

 

पत्रिकाः आप जीवन के आखिरी पड़ाव पर युवाओं को क्या संदेश देना चाहते हैं?

चिम्मनलाल जैनः गांधी जी का संदेश बेकार साबित हुआ। वे तपस्वी थे। जब उनकी बात नहीं सुनी तो हमारी कौन सुनेगा। संदेश-फंदेश नहीं देना चाहिए। भगवान जो करेगा, वह होगा। मोदी ने सांसदों का भत्ता 50 हजार रुपये से बढ़ाकर ढाई लाख कर दिया। अरबों रुपया यही खा जाते हैं। संदेश देने से क्या होगा?

Red Fort national flag

पत्रिकाः आप राजनीति में क्यों नहीं आए?

चिम्मनलाल जैनः पॉलिटिक्स बेईमानों की हो गई है। हम बेईमानी को बुरा मानते हैं।

 

पत्रिकाः बेईमानों का नाश कैसे हो सकता है

चिम्मनलाल जैनः (ऊपर की ओर इशारा किया) यानी ऊपर वाला खत्म करेगा। भ्रष्टाचार खत्म नहीं हो सकता है। जो कहता है, वह अहंकार की बात करता है।

 

कौन हैं चिम्मलाल जैन

चिम्मलाल जैन का जन्म जनवरी, 1919 में किरावली तहसील के गांव कीठम में हुआ था। उनके पिता गोपीचंद जैन पटवारी का काम करते थे। 14 साल की उम्र में उन्होंने हिन्दी मिडिल की परीक्षा उत्तीर्ण की। आर्थिक दशा खराब होने पर कपड़े की दुकान पर नौकरी की। एक दिन उन्होंने देखा कि कोतवाली के सामने सत्याग्रहियों को घोड़ों से रौंदा जा रहा है। इसके बाद वे क्रांतिकारी दल से जुड़ गए। रिवाल्वर और बम बनाना सीखा। गांव कीठम और ननिहाल मनकापुर में रहकर युवकों को एकत्रित किया। उनका मुख्य काम बम के लिए बारूद एकत्रित करना था। 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में उन्होंने मुख्य भूमिका निभाई। रेलवे के तार काटे। लैटरबॉक्स में आग लगाई। गुप्त रूप से प्रकाशित होने वाले समाचार पत्र से जुड़ गए। आगरा कॉलेज के प्रिंसिपल की मेज, पुरानी कोतवाली के डाकखाने में बम धमाका किया। तारा सिंह धाकरे नामक साथी के हाथ में बम फट गया था। ब्रिटिश सेना के लिए टैंट बनाने वाली फैक्ट्री में आग लगाई। इसमें उनके हाथ झुलस गए। पुलिस ने उन्हें पिता और आठ साथियों के साथ गिरफ्तार कर लिया। कोतवाली में यातनाएं दी गईं, लेकिन कुछ उगला नहीं। ढाई साल तक जेल में रहे। 1945 में रिहा किया गया। फिर वे गांधी आंदोलन से जुड़ गए। भूदान आंदोलन और सर्वोदय आंदोलन से जुड़े। 1962 से अब तक शराब बंदी आंदोलन चला रहे हैं। आगरा में अनेक दुकानों के सामने सत्याग्रह किया। शराब बंदी न होने पर उन्होंने 2 अक्टूबर, 2015 को यमुना में जलसमाधि लेने की घोषणा की। उन्हें घर में ही नजरबंद कर दिया गया। उन्होंने इस तरह की घोषणा तीन बार की, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी।

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