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गाय के गोबर से बनायें गोवर्धन, जानिए क्यों 

गाय के गोबर का ही इस पूजा में विशेष स्थान होता है। 

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Dhirendra yadav

Oct 31, 2016

Govardhan Puja 2016

Govardhan Puja 2016

आगरा। दीपावली के बाद आज कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को गोवर्धन उत्सव मनाने की तैयारी चल रही है। इस दिन बलि पूजा अन्न कूट, मार्गपाली आदि उत्सव भी सम्पन्न होते हैं। अन्नकूट या गोवर्धन पूजा भगवान कृष्ण के अवतार के बाद द्वापर युग से प्रारम्भ हुई। इस पूजा में गाय के गोबर से गोवर्धन महाराज के विग्रह को बनाया जाता है। ज्योतिषाचार्य बताते हैं, कि गाय के गोबर का ही इस पूजा में विशेष स्थान होता है।

इसलिए जरूरी है गाय का गोबर
ज्योतिषाचार्य डॉ. अरविंद मिश्र ने बताया कि गाय का गोबर शुद्ध माना जाता है। वहीं गोवर्धन पूजा में गोधन यानि गायों की पूजा भी की जाती है। गाय को देवी लक्ष्मी का स्वरूप भी कहा गया है। लक्ष्मी जिस प्रकार सुख समृद्धि प्रदान करती हैं उसी प्रकार गौ माता भी अपने दूध से स्वास्थ्य रूपी धन प्रदान करती हैं। गाय के गोबर से तमाम तरह की विशुद्धियां दूर हो जाती हैं।


गाय का गोबर न मिले तो ये भी कर सकते हैं
ज्योतिषाचार्य डॉ. अरविंद मिश्र ने बताया कि शहर में गोबर मिलना ही बहुत कठिन होता है। लेकिन गौशाला आदि से इस पूजन के लिए गोबर जरूर लाना चाहिए। आज के दिन बड़े बड़े आयोजन होते हैं, जिसके चलते गोबर की कमी हो जाती है, इसलिए गाय का गोबर थोड़ा स ले लें, उसे भैंस के गोबर में मिलाकर गोवर्धन महाराज का विग्रह बनाएं। अच्छे भाव से पूजा करें, हर मनोकामना पूरी होगी।

गोवर्धन पूजन करने की विधि
दीपावली के बाद होने वाली गोवर्धन पूजा का विशेष महत्व है। इस पूजन में घर के आंगन में गाय के गोबर से गोवर्धन नाथ जी की अल्पना बनाकर उनका पूजन करते हैं। इसके बाद ब्रज के साक्षात देवता माने जाने वाले गिरिराज भगवान को प्रसन्न करने के लिए उन्हें अन्नकूट का भोग लगाया जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में गाय बैल आदि पशुओं को स्नान कराकर फूल मालाए धूपए चन्दन आदि से उनका पूजन किया जाता है। गायों को मिठाई खिलाकर उनकी आरती उतारी जाती है तथा प्रदक्षिणा की जाती है। गोबर से गोवर्धन पर्वत बनाकर जलए रोलीए चावलए फूल दही तथा तेल का दीपक जलाकर पूजा करते है तथा परिक्रमा करते हैं।

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