
Agra's Leather Industry
आगरा। जीएसटी का एक साल पूरा होने पर जहां सरकार जश्न मना रही है, वहीं आगरा के जूता कारोबार से जुड़े करीब लोग इस दर्द को भुलाने में लगे हैं। जीएसटी ने आगरा के इस अहम कारोबार से जुड़े तीन लाख लोगों को प्रभावित किया। जूता कारोबारियों की मानें तो जीएसटी लागू होने के बाद जूता कारोबार में 50 फीसद तक की गिरावट आई।
ये थी जूता कारोबार की स्थिति
आगरा की बात करें तो यहां दैनिक जूता कारोबार की स्थित करीब 20 करोड़ की थी, लेकिन जीएसटी लागू होने के बाद ये आधी रह गई। आगरा में कार्यरत 5000 इकाइयां सीधे इससे प्रभावित हुईं। मुख्य जो समस्या आई वो थी जीएसटी टैक्स स्लेब, सस्ते जूते पर अमिट छाप और जीएसटी का नियम पालन। वहीं सबसे अधिक प्रभावित छोटे उद्यमी हुए। हालांकि 500 रुपये तक के जूते पर 5 फीसद और उससे अधिक के जूते पर 18 फीसद जीएसटी लागू किया गया।
बंदी की कगार पर घरेलू कारोबार
आगरा शू फैक्टर्स फैडरेशन के अध्यक्ष गागनदास रमानी ने बताया कि सरकार ने फुटवियर के लिए नियम बनाते समय मशीन से फुटवियर बनाने वाली इकाइयों का तो ध्यान रखा, लेकिन हाथ से जूता बनाने वाले छोटे कारीगरों के लिए कुछभी नहीं सोचा। परिणाम ये हुआ कि आगरा का घरेलू फुटवियर उद्योग आधा रह गया और धीरे धीरे समाप्त की कगार पर है।
नहीं हुई सुनवाई
आगरा शू फैक्टर्स फैडरेशन के के महामंत्री दिलीप खूबचंदानी ने बताया कि चयन उत्पाद होने की वजह से रिटेलर एमआरपी तय करता है। कुटीर उद्योग के लिए पहले से रेट एंबॉस कर पाना मुश्किल है। यह नियम हावी होने की वजह से शहर का घरेलू फुटवियर उद्योग काफी परेशान है। कई बार अपनी व्यथा हाईकमान तक पहुंचा चुके हैं, लेकिन सुनवाई नहीं हुई।
Published on:
01 Jul 2018 03:16 pm
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