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Hariyali Teej 2018: आज के दिन पार्वती माता का महादेव के साथ हुआ था मिलन, पूजन व व्रत से सुहागिनों की पूरी होती है हर कामना

Sawan hariyali Teej 2018 : जानिए हरियाली तीज कब है? कैसे मनाते हैं, क्या है इसका महत्व, पूजा का शुभ मुहूर्त।

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आगरा

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suchita mishra

Aug 11, 2018

आगामी सोमवार यानी 13 अगस्त को Hariyali teej है। हरियाली तीज महादेव और माता पार्वती के मिलन का दिन है। इस लिहाज से ये दिन सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। माना जाता है कि अगर सुहागिन स्त्रियां इस दिन विधि विधान से माता पार्वती और भोलेनाथ का पूजन करती हैं तो उनके पति की आयु लंबी होती है, साथ ही परिवार में धन धान्य, संपत्ति आदि की कमी नहीं रहती। तीज का दिन महादेव और माता पार्वती दोनों के लिए खास होता है, ऐसे में जो भी महिला उनकी भक्ति पूरे भाव से करती है उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। वहीं यदि कुंवारी लड़की शिव गौरी की आराधना करे तो उसे मनचाहा जीवन साथी मिलता है।

इसलिए मनाते हैं हरियाली तीज
यूं तो साल में चार तीज होती हैं, लेकिन सबसे ज्यादा महत्व Hariyali Teej का है। माना जाता है कि 108 वर्षों की कठोर तपस्या के बाद इस दिन भोलेनाथ ने माता गौरी को पत्नी के रूप में स्वीकार किया था। उस दिन तीज का दिन था और सावन का महीना था। सावन के महीने को हरियाली का महीना कहा जाता है। लिहाजा तभी से हरियाली तीज के दिन को उत्सव का दिन बना लिया गया। चूंकि इस दिन माता पार्वती की तपस्या सफल हुई इसलिए ये दिन सुहागिनों के व्रत, पूजन व सौभाग्य का दिन माना गया है।

ऐसे करें पूजन
पूजन के लिए सबसे पहले महिलाएं स्नान कर नए वस्त्र पहनें। उसके बाद व्रत या पूजन का संकल्प लें। उसके बाद माता पार्वती को सिंदूर आदि लगाकर धूप जलाएं और हरियाली तीज की कथा पढ़ें। चावल और बेसन की मिठाई बनाकर भोग लगाएं। भोग के चार हिस्से कर एक खुद लें, एक सास को दें, एक गाय को खिलाएं व एक किसी कन्या या पंडित को दे दें। इस दिन निर्जला व्रत का काफी महत्व है। लेकिन अगर स्वास्थ्य सही नहीं है तो फलाहार ले सकते हैं। चंद्रमा को देखकर व्रत खोलें।

पूजा का शुभ मुहूर्त
13 अगस्‍त की सुबह 8 बजकर 38 मिनट पर हरियाली तीज की तिथि आरंभ होगी और 14 अगस्‍त की सुबह 5 बजकर 46 मिनट तक रहेगी। लिहाजा सुबह 8 बजकर 38 मिनट के बाद किसी भी समय पूजन कर सकते हैं।

हरी चूड़ियों का विशेष महत्व
हरियाली तीज उत्सव का दिन है। इस दिन महिलाएं सज संवरकर भोलेनाथ और माता पार्वती का पूजन करती है। व्रत रखती हैं। तीज के गीत गाती हैं और नृत्य करती हैं। इस दिन झूला भी झूलने की प्रथा है। हरियाली तीज पर हरी चूड़ियां और हरी साड़ी पहनने का विशेष महत्व है।