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मियां तू हमसे न रख कुछ गुबार होली में..

होली पर रंगों से तो लोग सराबोर होते ही हैं, लेकिन कई साहित्यकार भी ऐसे हुए जिन्होंने अपनी रचनाओं से माहौल और रंगीन बना दिया। ऐसे ही थे प्रख्यात शायर मियां नज़ीर अकबराबादी।

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Bhanu Pratap Singh

Mar 23, 2016

Nazir Akabrabadi

Nazir Akabrabadi

आगरा।
स्पर्श का बड़ा महत्व है। वह भी ऐसी दुनिया में जहां दूरियां लगातार बढ़ रही हैं। होली अवसर देता है कि आप हम साथ आएं। एक समाज बनाएं। बिना रंग और भंग के तो होली होती ही नहीं और जब होली के जोश, उमंग, हुड़दंग और अबीर-गुलाल में साहित्य से जुड़े लोगो की रचनाओं का रस घुल जाता है तो माहौल ही बदल जाता है।


नजीर अकराबादी ने नज़्मों से होली में भरे रंग

आगरा के जनकवि और प्रख्यात शायर मियां नज़ीर अकबराबादी ने होली पर करीब एक दर्जन नज़्में कही हैं। मियां नज़ीर ने हमेशा सद्भाव और प्रेम बढ़ाने की बात कही। मियां नज़ीर ने युवाओं के उल्लास और उमंग को ध्यान में रखकर होली को यूं बयां किया


जब फागुन रंग झमकते हों तब देख बहारें होली की

और डफ के शोर खड़कते हों तब देख बहारें होली की,

और एक तरफ दिल लेने को महबूब गवैयों के लड़के

हर आन घड़ी गत भरते हों कुछ घट-बढ़ के कुछ बढ़-बढ़ के,

कुछ नाज जतावें लड़-लड़ के कुछ होली गांवें अड़-अड़ के

कुछ लचके शोख कमर पतली कुछ हाथ चले कुछ तन फड़के

कुछ काफिर नैन मटकते हों तब देख बहारें होली की।


युवाओं की धड़कन बने नजीर

नजीर जनकवि ही नहीं युवाओं की धड़कन थे। एक लंबे अरसे तक परंपरा चली कि अकबराबाद यानि आज के आगरा के हुरियारे होली में नजीर की कब्र पर जमा होते थे और होली गायी जाती थी। यह मेला लंबे अरसे तक चला और फिर बंद हो गया। अब न नजीर रहे, न अकबराबाद रहा, न हुरियारे रहे और न वैसी होली रही।


मियां! तू हमसे न रख कुछ गुबार होली में।

कि रूठे मिलते हैं आपस में यार होली में।।

मची है रंग की कैसी बहार होली में।

हुआ है जोर चमन आश्कार होली में।।

अजब यह हिन्द की देखी बहार होली में।।


क्या कहना है साहित्यकारों का

डीआईइ की प्रोफेसर डॉ कविता रायजादा के शब्दों में अगर कहा जाये तो

प्रेम सद्भाव का त्यौहार है होली, गले मिलकर नफरत मिटाने का त्यौहार है होली।


वहीं बैंकुंठी देवी की हिंदी की प्रोफेसर डॉ रमा रश्मि कहती हैं

तुम्हारे प्रेम का बंधन हमारी प्रीत की डोरी,

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खिला अनुराग का चन्दन तो पावन हो गयी होरी।


पूर्व प्राचार्य डॉ नीलम भटनागर के शब्दों में होली

होली है होली है चहुं दिशा होली

कल भी थी होली आज भी है होली

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अपनों का प्यार है होली बोली की मिठास है होली।


बीडी जैन कॉलेज की की विभागाध्यक्ष डॉ माला गुप्ता के शब्दों में होली की अलग ही छटा बिखर जाती है

त्यौहार का मौसम आया चहुं ओर, फैली है उमंग

बसंत गया फागुन आया, चल फागुन में भर दें रंग।


जाने माने कवि सुशील सरित का कहना है

बहुत दिनों से किया है जो नहीं ऐ यार होली में

चल अब मिलकर करते हैं वही इस बार होली में।

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