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तंत्र साधना के लिए तलाशे उल्लू, कैसे चले गए लाखों रुपये जानें यहां

कारोबारियों ने तंत्र साधना के लिए तलाशे उल्लू, लेकिन नहीं मिले, लाखों रुपये हाथ में लेकर घूमते रहे कारोबारी

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आगरा

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Abhishek Saxena

Oct 19, 2017

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आगरा। महालक्ष्मी की वाहन खतरे में हैं। लक्ष्मीजी के वाहन उल्लू आगरा के व्यापारियों के निशाने पर है। तंत्र साधना में उल्लू की बलि देकर धनवान बनने का लालच रखने वाले लोगों के चलते दीपावली के इस पावन पर्व पर गुम हो रही इस प्रजाति पर खतरा मंडराने लगा है। कुछ भ्रमित लोगों का मानना है कि तंत्र साधना कर उल्लू की बलि देकर अमावस्या की काली रात को सोने—चांदी से रोशन किया जा सकता है।
ऐसे कुछ अंधविश्वासी कारोबारी उल्लू के लिए उल्लू बने घूम रहे हैं। उल्लू खरीदने के लिए तस्करों को रकम भी दे दी। अब उल्लू नहीं मिल रहे हैं। तस्कर भी रकम ऐंठकर बैठ गए हैं।

खरीदारों ने थमाए लाखों रुपये
उल्लू की खरीदारी के लिए आगरा के कई व्यापारी उल्लू बन गए हैं। एक प्रतिष्ठित सोने चांदी के शोरूम के मालिक ने आगरा में पक्षियों की खरीद फरोख्त करने वाले जहीर को मनपसंद उल्लू की खरीद के लिए लाख रुपये का आॅफर दिया और हजारों रुपये एडवांस में थमा दिए। जहीर ने बताया कि उल्लू खरीदने के लिए आगरा के कई बड़े कारोबारियों ने उनसे संपर्क किया। उल्लू के खरीदारों ने बीहड़ों में शिकारियों को पचास हजार रुपये से लेकर एक लाख रुपये तक थमा दिए। लेकिन, तंत्र साधना में जिस वजन का उल्लू चाहिए, वो नहीं मिल रहा है। एक उल्लू की कीमत उसके वजन और उम्र पर निर्भर करती है और दीपावली की अमास्या के रात में उल्लू बेशकीमती हो जाता है। इस दिन तीन लाख रुपये तक कीमत हो जाती है। खरीदरों को जब उल्लू नहीं मिल रहे हैं, तो उनके रुपये भी डूब गए हैं।

सजता था बाजार
आगरा में उल्लूओं के लिए बाजार सजता था। सूत्रों के मुताबिक आगरा में जामा मस्जिद के पास, वजीरपुरा, ईदगाह, वसई अरेला, बिजलीघर, सैयद मीर हुसैनी चौराहा आदि स्थानों पर देर रात को उल्लुओं का बाजार लगता था। ये बाजार पुलिस की नजर दूर रहता था। इस विलुप्त होती प्रजाति पर पुलिस—प्रशासन और वन्य जीव संरक्षण विभाग की नजर है। उल्लू बचाने के लिए सभी सक्रिय हैं, ऐसे में पिछले दिनों आगरा में बाजार नहीं लग सका।

कालाजादू के लिए मानते हैं लोग
लक्ष्मीजी के वाहन के साथ ऐसा बर्ताव सदियों पुरानी धारणा है कि उल्लू लक्ष्मीजी का वाहन है और धन और समृद्धि की देवी को खुश करने के लिए यह शुभ त्योहार माना जाता है। इस दिन उल्लू का बलिदान कर कर देवी घरों में लाने की कल्पना लोग करते हैं। आधुनिक भारत में ये अंधविश्वास की परिपाठी क्या लोगों का मिथक तोड़ पाएगी। ये अभी भी सवाल बना हुआ है। धार्मिक मिथकों और अंधविश्वासों पर किसी का भी वश नहीं है। लोगों का मानना है कि लक्ष्मीजी के वाहन ये वे धन लाभ अर्जित कर सकते हैं। खोपड़ी, हड्डियां, पंख, मांस, नाखून और रक्त को तावीज़ में उपयोग किया जाता है। अंधविश्वास की धारण ये है कि उल्लू के नाखून को काला जादू में उपयोगी मानते हैं। कहीं—कहीं पर पारंपरिक दवाओं आदि के रूप में पक्षी के शरीर के अंगों को उपयोग करते हैं। उल्लू के रूप में सींग वाला उल्लू डिमांड में रहता है। सिर पर पंख एक्सटेंशन रहस्यमय गुण माने जाते हैं।

उल्लू नहीं ऐसे करें पूजा तो होगी धनवर्षा
ज्योतिषाचार्य पंडित डॉ.अरविंद मिश्र का कहना है कि दीपावली पर मां लक्ष्मी की स्तुति कमलगट्ठे की माला से 11 बार जाप कर करें। विधि विधान से धन की देवी की उपासना करें। घर में सुख शांति रखें। मन में शुद्ध विचार रखें, तो लक्ष्मीजी खुद ही प्रसन्न होकर कृपा बरसाएंगी। किसी पक्षी की बलि देने से भगवान या देवी प्रसन्न नहीं होते हैं। इससे मनुष्य पाप का भागीदार बनता है। उल्लू लक्ष्मीजी का वाहन हैं, उसकी बलि देने की धारणा बिल्कुल गलत है।

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