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बेटी पैदा होने पर ससुरालियों की प्रताड़ना सहन नहीं कर सकी विवाहिता और ऐसी हो गई जिंदगी…

— आगरा के शमशाबाद रोड स्थित रजरई गांव का मामला, दो साल से बेटी की हालत देखकर आंसू बहा रहा है परिवार।

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आगरा

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arun rawat

Aug 02, 2021

Vivahita

शादी के समय पति के साथ महिला, शादी के बाद घर में पलंग पर लेटी सुधबुध खो बैठी पीड़िता

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
आगरा। बेटे की चाहत में क्या कोई इस कदर पागल हो सकता है कि बहू को प्रताड़ित करना शुरू कर दे। ऐसा ही एक मामला आगरा में सामने आया है। विवाहिता के बेटी पैदा होने पर ससुरालीजनों ने उसे इतना प्रताड़ित किया कि वह कौमा में चली गई। विगत दो साल से विवाहिता जिंदा लाश बनी हुई है। बेटी की ऐसी हालत देखकर उसके परिजनों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं।
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यह था मामला
दरअसल यह मामला है आगरा शमशाबाद मार्ग स्थित ताजगंज थाना क्षेत्र के गांव रजरई का है। यहां के रहने वाले त्रिलोकी नाथ वर्मा ने अपनी बेटी गौरी बंदना का विवाह शाहगंज थाना क्षेत्र के नरीपुरा के रहने वाले त्रिवेंद्र कुमार के साथ में किया था। त्रिवेंद्र इस समय गाजियाबाद में रेलवे विभाग में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद पर कार्यरत है। पढ़ाई में अब्बल एमएससी की टॉपर गौरी वंदना को यह नहीं मालूम था कि उसके जीवन में इतना बड़ा पहाड़ टूट जाएगा कि वह ख़ुशहाल जिंदगी के लिए तरस जाएगी। गौरी के परिवार के लोग कहते हैं कि शादी के बाद से ही ससुराल के लोगों ने गौरी को बेटा पैदा करने के लिए प्रताड़ित करना शुरू कर दिया था।। गौरी वंदना पर लड़का होने का दबाव बनाया जा रहा था। आगरा के लेडी लायल अस्पताल में जब गौरी की डिलीवरी हुई तो गौरी ने एक बेटी को जन्म दिया। बस यहीं से गौरी का शोषण और ज्यादा शुरू हो गया था। और गौरी उसी दिन से कोमा में चली गई।
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बेटी नहीं पहचानती अपनी माँ को
हैरत की बात यह है कि 2 साल 27 महीने से कोमा में रहने वाली गौरी आज तक अपनी बेटी की शक्ल तक नहीं देखी तो वहीं बेटी भी आज तक अपनी मां को नहीं पहचानती है। जहां उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान चला रही है तो वहीं आज भी समाज में ऐसे दरिंदे मौजूद हैं जो बेटी के नाम पर बेटियों का शोषण कर रहे हैं। एक तरफ विवाहिता 2 साल 27 दिन से कोमा में है वहीं उसके परिवार की आर्थिक स्थिति भी अच्छी नहीं है। त्रिलोकी नाथ वर्मा पर गौरी के अलावा तीन और बेटियां भी हैं। इस परिवार पर कोई बेटा नहीं है। ऐसे में त्रिलोकी नाथ वर्मा की जो भी पेंशन आती है उस पूरी पेशन का खर्चा गौरी के इलाज में खर्च हो जाता है। अब परिवार के सामने रोजी रोटी और आर्थिक तंगी की एक विकराल समस्या खड़ी हो गई है।