
Aaj ka rashifal
भगवान ब्रह्मा के मानस पुत्र धर्म की एक पत्नी का नाम रुचि था। रूचि के गर्भ से श्री हरि ने नर और नारायण नाम के दो महान तपस्वियों के रूप में धरती पर जन्म लिया। इनके जन्म का कारण संसार में सुख और शांति का विस्तार करना था। जन्म के बाद उनका धर्म, साधना और भक्ति में ध्यान बढ़ता ही गया। अपनी माता से आज्ञा लेकर वे उत्तराखंड के पवित्र स्थली बदरीवन और केदारवन में तपस्या करने चले गये। उसी बदरीवन में आज बद्रीकाश्रम बना है।
कई हजार सालों की महान तपस्या से इन दोनों भाइयो से भगवान शिव को अत्यंत प्रसन्न किया। शिवजी ने उन्हें दर्शन देकर वरदान मांगने के लिया कहा, पर जन लोककल्याणार्थ नर नारायण ने अपने लिए कुछ नही माँगा और शिवजी से विनती की वे इस स्थान में पार्थिव शिवलिंग के रूप में हमेशा रहे। शिवजी ने उनकी विनती स्वीकार कर ली और आज जिस केदारनाथ ज्योतिर्लिंग के हम दर्शन करते हैं, उसी में शिवजी का आज भी वास है। इसके आस पास मंदिर का निर्माण पांडवो ने करवाया। बाद में इसका दोबारा निर्माण आदि शंकराचार्य ने करवाया था। इसके बाद राजा भोज ने यहां पर भव्य मंदिर का निर्माण कराया था। फिर इन दोनों भाइयो ने बदरीवन में जाकर विष्णु के मंदिर बद्रीनाथ में प्रतिमा की स्थापना की। उत्तराखंड के चार धाम की यात्रा में बद्रीनाथ धाम अलकनंदा नदी के किनारे पर स्थित है। आज भी इस जगह दो पर्वत नर नारायण के नाम के हैं। ऐसी मान्यता है की वे आज भी परमात्मा की तपस्या में लीन हैं।
Published on:
03 Dec 2018 08:10 am

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