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International Family Day: तीन पीढ़ियों के 21 सदस्य आज भी रहते हैं एक छत के नीचे…

International Family Day 2020 के मौके पर जानिए आगरा शहर के ऐसे परिवार के बारे में जहां तीन पीढ़ियां आज भी बहुत प्यार से एक साथ रहती हैं।

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आगरा

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Neeraj Patel

May 15, 2020

International Family Day: तीन पीढ़ियों के 21 सदस्य आज भी रहते हैं एक छत के नीचे...

International Family Day: तीन पीढ़ियों के 21 सदस्य आज भी रहते हैं एक छत के नीचे...

आगरा. परिवार से बड़ा कोई धन नहीं होता। परिवार व्यक्ति की ताकत होता है। उसकी पहचान होता है क्योंकि परिवार ही उसे अच्छे-बुरे लक्षण सिखाता है। व्यक्ति के चरित्र निर्माण में परिवार की अहम भूमिका होती है। यदि परिवार साथ हो तो बड़े से बड़ा संकट भी आसानी से पार हो जाता है। लेकिन आजकल की दौड़ भाग भरी जिंदगी ने इन परिवारों को बहुत छोटा कर दिया है। ज्यादातर शहरी इलाकों में अब संयुक्त परिवार की अपेक्षा ज्यादातर एकल परिवार देखने को मिलते हैं। लेकिन आज International Family Day 2020 के मौके पर हम आपको बताने जा रहे हैं आगरा शहर के एक ऐसे परिवार के बारे में जहां तीन पीढ़ियां एक साथ रहती हैं। घर में एक ही रसोई में मिलकर सारा काम होता है और सभी सदस्य एक दूसरे को पूरा आदर और सम्मान देते हैं।

तीन पीढ़िया रहती हैं साथ

हम बात कर रहे हैं आगरा के कमला नगर के रहने वाले सुरेन्द्र कुमार जैन के परिवार की। सुरेंद्र के परिवार में तीन पीढ़ियां आज भी एक ही छत के नीचे रहती हैं। कुछ समय पहले तक उनके पिता शीतल प्रसाद जैन ने पूरे घर की जिम्मेदारी संभालते थे। लेकिन दो साल पहले उनकी बीमारी के चलते मृत्यु हो गई। उसके बाद सारे परिवार को एक सूत्र में बांधे रखने की जिम्मेदारी उनकी मां सीतारानी जैन और चाचा पारस बाबू जैन ने संभाली हुई है। सुरेंद्र बताते हैं कि उनके पिता शीतल प्रसाद जैन के पांच बच्चे और चाचा पारस बाबू जैन के चार बच्चे हैं। यानी वे नौ भाई बहन हैं जो हमेशा से एकसाथ रहे हैं। कभी उनके परिवार में अपने पराए जैसी भावना किसी के मन में नहीं आयी।

बहनें त्योहारों पर आकर परिवार की बढ़ाती हैं रौनक

उनके घर में एक ही रसोई में खाना बनता है। सब मिलकर साथ खाते हैं। हंसी मजाक होते रहते हैं। जिन बहनों की शादी हुई, वे आज भी इस परिवार से उतना ही प्यार करती हैं और इस परिवार का हिस्सा है। तमाम त्योहारों या अन्य मौकों पर वे घर में आकर रौनक बढ़ाती हैं। सुरेंद्र का कहना है कि आजकल लोगों को एक दूसरे के लिए समय ही नहीं है। परिवार एकल हो चुके हैं। लेकिन मेरे लिए ये गर्व की बात है कि इस मॉडर्न युग में भी हम सब एक साथ हैं।

21 लोग रहते हैं एक साथ

परिवार के इस माहौल का सकारात्मक असर तीसरी पीढ़ी यानी हम सब नौ भाई बहनों के बच्चों पर भी है। सुरेंद्र व उनके भाइयों के मिलाकर परिवार में 9 बच्चे हैं। पूरे परिवार में तीन पीढ़ियों के कुल 21 सदस्य रहते हैं। लेकिन कभी किसी के मन में मनमुटाव वाली स्थिति नहीं आयी। इसके अलावा उनकी सभी बहनों के छह बच्चे हैं, वो भी इस परिवार का हिस्सा हैं। सभी बच्चों के बीच आपस में वही प्यार है जो हम सब भाई बहनों के बीच में रहा है।

संयुक्त परिवार से युवा व बाल पीढ़ी को मिलती है सीख

सुरेंद्र का कहना है कि आज के समय में संयुक्त परिवारों की बहुत जरूरत है। इससे बुढ़ापे में जहां बुजुर्गों को संबल मिलता है। वहीं उनके अनुभव व ज्ञान से हमारी युवा व बाल पीढ़ी को जीवन की सीख मिलती है। आपस में एक दूसरे के प्रति प्रेम और सम्मान की भावना बढ़ती है। लेकिन ये अफसोस की बात है कि लोग संयुक्त परिवार के महत्व को भूलकर एकल परिवार की ओर बढ़ रहे हैं।