
आगरा। अखिल भारतीय लोधी क्षत्रिय (राजपूत) महासभा के राष्ट्रीय महामंत्री लोधी हुकुम सिंह देशराजन (hukum singh dehjrajan) अलीगढ़ (Aligarh) में रहते हैं और पूरे देश में भ्रमण करते हैं। लोधी समाज (Lodhi samaj) की आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक उन्नति के लिए प्रयासरत हैं। इन दिनों वे शिक्षा क्षेत्र में सर्वाधिक कार्य करने वाले स्वामी ब्रह्मानंद (swami brahmanand) के नाम पर विश्वविद्यालय (University) का नाम रखवाने के लिए प्रयासरत हैं। उनकी पीड़ा है कि उत्तर प्रदेश सरकार (Uttar Pradesh Government) उनकी बात सुन नहीं रही है। वे साफतौर पर कहते हैं कि लोधी समाज के सांसद, विधायक, मंत्री, मुख्यमंत्री समाज के लिए लाभकारी सिद्ध नहीं हुए हैं। क्या लोधी समाज पूरी तरह भाजपा के साथ आ जाएगा, जैसा सवाल उनसे पूछा गया तो बड़ी बात कह दी। समाजवादी पार्टी (Samajwadi party) के वरिष्ठ नेता प्रवीन राजपूत (Praveen Rajput) के साथ पत्रिका (Patrika) आगरा (Agra) कार्यालय में आए हुकुम सिंह देशराजन से लम्बी बातचीत हुई। प्रस्तुत हैं मुख्य अंश-
पत्रिकाः देश में लोधी समाज की क्या स्थिति है?
हुकुम सिंह देशराजनः लोधी समाज खेती पर आधारित समाज है। लोधी समाज के बहुत कम लोग राजकीय सेवाओं, व्यापार और उद्योग के क्षेत्र में हैं। इस दृष्टि से जब हम लोधी समाज की सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से विश्लेषण करते हैं तो पाते हैं कि लोधी समाज देश के अति पिछड़े वर्ग में आता है। जहां तक शिक्षा में अवसर का प्रश्न है तो जो होना चाहिए था, वह विकास नहीं हुआ है। यद्यपि 27 फीसदी आरक्षण की व्यवस्था है. इसके बाद भी लोधी समाज को प्रशासनिक क्षेत्र में वह अवसर नहीं मिल पाया, जिसका वह हकदार है।
पत्रिकाः पढ़ेगे तो आगे बढ़ेगे, पढ़ते कहां हैं लोधी समाज के लोग?
हुकुम सिंह देशराजनः ऐसा नहीं है कि लोधी समाज के लोग शिक्षा के क्षेत्र में आगे नहीं आ रहे हैं। हमारे देश में जाति व्यवस्था है और इसका प्रभाव प्रशासनिक और राजनतिक क्षेत्र समेत सभी क्षेत्रों में देखने को मिलता है। लोधी समाज के आगे न बढ़ पाने का एक कारण यह भी है कि प्रशासनिक सेवाओं में उसके साथ भेदभाव होता है। योग्यता के आधार पर उतना नहीं मिल पाता है, जो मिलना चाहिए।
पत्रिकाः किसी भी समाज के उत्थान की कुंजी राजनीति होती है, उसमें समाज की क्या दखलंदाजी है?
हुकुम सिंह देशराजनः मैं इस बात से पूरी तरह से सहमत हूं। लोधी समाज के लोग सांसद बने, विधायक बने, मंत्री बने, यहां तक कि मुख्यमंत्री बने, लेकिन जिस तरह से अन्य वर्गों के लोगों ने प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अपने समाजों की पूरी मदद दी, लेकिन लोधी समाज के नेतृत्व ने ऐसा नहीं किया। दूसरे लोग तो केवल आदर्श के तौर पर बातें करते हैं, मगर लोधी समाज का नेतृत्व ने पदों पर पहुंचने के बाद भी जातगित आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया। इसका नतीजा ये निकला कि जो हिस्सेदारी मिलनी चाहिए थी, वह नहीं मिली।
पत्रिकाः यादव समाज और जाटव समाज एक पार्टी के साथ है, लोधी समाज किस पार्टी के साथ है?
हुकुम सिंह देशराजनः पूरे देश में लोधी समाज बहुमत में भारतीय जनता पार्टी के साथ है। इसके बाद भी भारतीय जनता पार्टी की नीतियां और कार्यक्रम लोधी समाज को आगे ले जाने के लिए नहीं हैं। भाजपा में रहते हुए जिस तरह अन्य जातियों के लोग अपने जाति वालों को समर्थन करते हैं, उस तरह से लोधी समाज का नेतृत्व नहीं कर रहा है। इसका उदाहरण यह है कि स्वामी ब्रह्मानंद के नाम पर किसी विश्वविद्यालय का नाम नहीं रखा गया। इसके लिए हम 25 साल से संघर्ष कर रहे हैं। हमने यह भी मांग की है कि कृषि विश्वविद्यालय, बांदा के साथ स्वामी ब्रह्मानंद का नाम जोड़ा जाए। चन्द्रशेखर, वीर बहादुर सिंह, हेमवती नंदन बहुगुणा के नाम पर विश्वविद्यालय बन गया।
पत्रिकाः राष्ट्रीय महामंत्री के रूप में आगे क्या करने जा रहे हैं?
हुकुम सिंह देशराजनः हमने मांगपत्र भेजा है। पूरे प्रदेश में जो हमारी जिला सभा हैं, राजनीतिक दलों के जो लोग स्वामी जी से प्रभावित रहे हैं, उनसे आग्रह करेंगे कि हर जिले से ज्ञापन जाए प्रदेश सरकार को। स्वामी जी की जन्मस्थली राठ में राष्ट्रीय स्तर पर कार्यक्रम करेंगे। फिर भी प्रदेश सरकार कोई कदम नहीं उठाती है तो आगे की रणनीति तय करेंगे।
पत्रिकाः लोधी समाज की शक्ति विभिन्न दलों में बँटी हुई है, क्या आप चाहते हैं कि किसी एक पार्टी में आ जाए।
हुकुम सिंह देशराजनः कोई समाज शत प्रतिशत किसी पार्टी के साथ आ जाएगा, यह कोई कल्पना है। हमारा उद्देश्य यह नहीं है कि सारे लोग एक पार्टी के साथ आ जाएं। हम चाहते हैं कि लोधी समाज प्रत्येक पार्टी में नेतृत्व संभाले। नेतृत्व मे भागीदारी नहीं होगी तो समाज को कोई फायदा नहीं हो सकता है।
Published on:
29 Oct 2019 05:55 pm
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