खैराती टोला के रहने वाले डॉ. सैयद इख्तियार जाफरी ने बताया कि शाहजहां गार्डन के पास स्थित खैराती टोला का नाम पहले खरादी टोला हुआ करता था। समय के साथ इसका नाम खैराती टोला हो गया। खरादी टोला इसलिए कहा जाता था, क्योंकि ताजमहल के पत्थरों की नक्काशी के लिए खराद का काम यहीं होता है। यहां पर पत्थरों पर डिजाइन बनने के बाद घोड़े, ऊंटगाड़ी से पत्थर निर्माण स्थल तक पहुंचाए जाते थे। उस समय पाड़ लगाकर भारी पत्थरों को उंचाई पर पहुंचाना संभव नहीं था, इसलिए खरादी टोला से ही एक रैम्प बनाए गए थे, जो ताजमहल की चोटी तक पहुंचते थे।