
Fatehpur sikri constituency
धीरेन्द्र यादव
आगरा। फतेहपुर सीकरी। विश्वदाय स्मारक। ऐतिहासिक नगरी। दुनियाभर के पर्यटकों की पसंद। यहां लघु भारत देखा जा सकता है। यहां लघु विश्व भी है। इस समय सिर्फ नगर पालिका परिषद का दर्जा। कभी भारत की राजधानी रही है। मुगल सम्राट अकबर ने 1571 से 1585 तक फतेहपुर सीकरी से ही शासन किया। फतेहपुर सीकरी में ही विश्व का सबसे बड़ा दरवाजा बुलंद दरवाजा है। यहीं पर शेख सलीम चिश्ती की दरगाह है। उन्हीं की दुआ से अकबर को संतान की प्राप्ति हुई। फतेहपुर सीकरी राणा सांगा और बाबर के बीच 1527 में हुए खानवा युद्ध की गवाह है। 2019 में फतेहपुर सीकरी में फिर से एक युद्ध होने जा रहा है। यह युद्ध है देश की सबसे बड़ी पंचायत संसद में पहुंचने का। तीन योद्धा हैं- भाजपा से राजकुमार चाहर, कांग्रेस से राज बब्बर और सपा-बसपा-रालोद गठबंधन से बसपा के श्रीभगवान शर्मा उर्फ गुड्डू पंडित। फतेहपुर सीकरी लोकसभा क्षेत्र में जाटों के 342 गांव हैं। इसी कारण इसे जाटलैंड कहा जाता है। जाटलैंड से उठी लहर मथुरा, भरतपुर, धौलपुर सीट को भी प्रभावित करती है। पत्रिका ने पांच अप्रैल, 2019 को पूरे दिन जाटलैंड का मन टटोला। खेतों में काम कर रहे किसानों के मन की बात जानी। आइए जानते हैं कि लोकसभा चुनाव के युद्ध में जाटलैंड का रुख क्या है?
भरतपुर रियासत का क्या रहता है असर
फतेहपुर सीकरी लोकसभा सीट पर पूरे उत्तर प्रदेश की नजर इसलिये है, क्योंकि कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर ने मुरादाबाद छोड़कर यहां से चुनाव लड़ने का फैसला किया है। फतेहपुर सीकरी की बात करें, तो ये राजस्थान सीमा से सटी हुई है। भरतपुर के महाराजा विश्वेन्द्र सिंह जो अभी कांग्रेस से विधायक और राजस्थान के पर्यटन मंत्री हैं, उनका कुनवा फतेहपुर सीकरी के दुल्हारा गांव में भी बसता है। साफ शब्दों में बताया जाये, तो उनके गोत्र के लोगों का ये पूरा गांव है, जो भरतपुर रियासत से आकर यहां बस गया था। यहां के जसवंत सिंह उर्फ होला पहलवान ने बताया कि महाराजा साहब का सम्मान करते हैं। समाजिक कार्यों में उनके साथ हैं, लेकिन राजनीति में उनकी बात मानकर कांग्रेस को वोट दें, ऐसा नहीं हो सकता है।
गली खरंजे पर नहीं, राष्ट्रीय मुद्दों पर है ये चुनाव
जाटलैंड कहे जाने वाले फतेहपुर सीकरी के एक दो नहीं बल्कि दर्जन भर से अधिक गांव जैसे दुल्हारा, दूरा, रौझोली, उंदेरा, सिरौली, सांवरा आदि गांव के जाटों से बात की गई, तो उनका साफ कहना था कि इस चुनाव में गली खरंजे पर नहीं, बल्कि राष्ट्रीय मुद्दों को ध्यान में रखते हुये वोट दिया जाता है। गांव रौझोली के राजेन्द्र सिंह निडर ने कहा कि रौझोली के कई जवान देश के लिये शहीद हुये हैं। 600 मकान वाले इस गांव के हर घर से दो से तीन जवान फौज में है। देशभक्ति हर गांववासी में कूट कूट कर भरी हुई है। इसलिये यहां के लोग ऐसा प्रधानमंत्री चाहते हैं, जो दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब दे सके और बीते दिनों में ये साफ हो चुका है कि देश के मौजूदा प्रधानमंत्री कैसे हैं।
342 गांव जाटों के जिधर करते हैं रुख, उसकी होती है जीत
फतेहपुर सीकरी लोकसभा की बात करें, तो 2014 के आंकड़ों के करीब 16 लाख वोटर हैं, इनमें 8.7 लाख पुरुष और 7 लाख से अधिक महिला वोटर शामिल हैं। जातिगत आंकड़ों को देखें तो ये सीट भी जाट बहुल बेल्ट के अंतर्गत ही आती है, कभी राष्ट्रीय लोकदल का इस सीट पर बड़ा प्रभाव रहता था, लेकिन जाटों ने रुख बदला, तो यहां लोकदल की नैया डूबती चली गई। जानकारों की मानें तो करीब दो लाख मतदाता इस लोकसभा में सिर्फ जाट है, जिसमें से सिर्फ फतेहपुर सीकरी विधानसभा में करीब 1 लाख 10 हजार मतदाता जाट है।
समस्याओं से वर्षों से जूझ रहे ये लोग
ऐसा नहीं है कि फतेहपुर सीकरी क्षेत्र में बड़ी समस्या नहीं हैं। यहां की सबसे बड़ी समस्या है, पेयजल और सिंचाई जल की। जाट बाहुल्य क्षेत्र में चौधरी चरण सिंह के समय से जाट इस लड़ाई को लड़ते चले आ रहे हैं, लेकिन आज भी ये समस्या जस की तस बनी हुई है। यहां के लोगों का कहना है कि बारिश या नहरों के भरोसे खेती होती है। नहरों में पानी देरी से आये, तो बड़ी परेशानी होती है, लेकिन इसके बाद भी जब राष्ट्रहित की बात आये, तो उसका स्थान सबसे ऊपर रखते हैं।
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Updated on:
05 Apr 2019 07:54 pm
Published on:
05 Apr 2019 07:52 pm

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