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भगवान विष्णु का अवतार हैं धनवं​तरि, धनतेरस के दिन इस तरह करें उनका पूजन, परिवार रहेगा निरोग और नहीं होगी धन की कमी

जानें भगवान धनवंतरि की पूजा विधि, मंत्र और आरती, धनतेरस की तिथि, पूजा व खरीददारी का शुभ मुहूर्त।

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आगरा

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suchita mishra

Nov 02, 2018

dhanteras

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दिवाली से दो दिन पहले धनतेरस का त्योहार मनाया जाता है। इसी दिन से दिवाली के पंचदिवसीय त्योहार की शुरुआत होती है जो पांचवे दिन भाई दोज के साथ खत्म होता है। इस दिन भगवान धनवंतरि का जन्म हुआ था। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी थी। धनवंतरि का जन्म व त्रयोदशी का मेल होने के कारण इस दिन को धनतेरस कहा जाता है। इस दिन मां लक्ष्मी—गणपति के पूजन के अलावा भगवान कुबेर और भगवान धनवंतरि की भी पूजा की जाती है। बता दें कि भगवान धनवंतरि ब्रह्मांड की सबसे प्राचीन चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद के देव हैं। उन्हें विष्णु भगवान का स्वरूप माना जाता है। उनके पूजन से परिवार में लोग निरोग रहते हैं। परिवार में सुख समृद्धि बनी रहती है। इस बार धनतेरस का त्योहार 5 नवंबर को पड़ रहा है। इस मौके पर जानते हैं भगवान धनवंतरि की पूजा विधि, मंत्र और आरती।

ये है पूजा विधि
सबसे पहले भगवान धनवंतरि की पूजा करने के लिए उनकी तस्वीर स्थापित करें। फिर हाथ में जल लेकर तीन बार आचमन करें। भगवान धनवंतरि का आवाह्न करें। फिर पुष्प से तस्वीर पर जल छिड़कें। तस्वीर पर रोली और अक्षत से टीका करें। पुष्प, दक्षिणा, वस्त्र अगर वस्त्र नहीं है तो कलावा अर्पित करें। फिर गणपति का मंत्र बोलकर पूजा की शुरुआत करें। इसके बाद भगवान धनवंतरि का ध्यान करते हुए ओम श्री धनवंतरै नम: मंत्र का 11, 21 या 108 बार जप करें। इसके बाद ये मंत्र बोलें। ओम नमो भगवते महासुदर्शनाय वासुदेवाय धनवंतराये:अमृतकलश हस्ताय सर्वभय विनाशाय सर्वरोगनिवारणाय।त्रिलोकपथाय त्रिलोकनाथाय श्री महाविष्णुस्वरूपश्री धन्वंतरि स्वरूप श्री श्री श्री अष्टचक्र नारायणाय नमः॥ मंत्र बोलकर भगवान धनवंतरि को प्रणाम करें।

आरती गाएं
पूजन करने के बाद दीप जलाकर भगवान धनवंतरि की आरती गाएं। ये है आरती।
ओम जय धनवंतरि देवा, जय धनवंतरि देवा।
जरा-रोग से पीड़ित, जन-जन सुख देवा।।जय धन.।।
तुम समुद्र से निकले, अमृत कलश लिए।
देवासुर के संकट आकर दूर किए।।जय धन.।।
आयुर्वेद बनाया, जग में फैलाया।
सदा स्वस्थ रहने का, साधन बतलाया।।जय धन.।।
भुजा चार अति सुंदर, शंख सुधा धारी।
आयुर्वेद वनस्पति से शोभा भारी।।जय धन.।।
तुम को जो नित ध्यावे, रोग नहीं आवे।
असाध्य रोग भी उसका, निश्चय मिट जावे।।जय धन.।।
हाथ जोड़कर प्रभुजी, दास खड़ा तेरा।
वैद्य-समाज तुम्हारे चरणों का चेरा।।जय धन.।।
धनवंतरिजी की आरती जो कोई जन गावे।
रोग-शोक न आवे, सुख-समृद्धि पावे।।जय धन.।।"

पूजन व खरीददारी का शुभ मुहूर्त
शाम 6:05 से 8:01 बजे तक है। धनतेरस पर खरीदारी का शुभ मुहूर्त सुबह 07:07 से 09:15 बजे तकए दोपहर 01:00 से 02:30 बजे तक, शाम 05:35 से 07:30 बजे तक रहेगा।