
ऐतिहासिक फूलों के ताजिये के साथ जुलूस की शुरुआत हुइ
इस्लामिक कैलेंडर के पहले माह आशूरा की दसवीं तारीख को पूरे देश में मोहर्रम के जुलूस निकाले गए। आगरा में पाय चौकी से निकलने वाले ऐतिहासिक फूलों के ताज़िए के साथ जुलूस की शुरुआत हुई और शाम तक सैकड़ों अकीदतमंदों ने ताजियों को कर्बला में दफन कर सपुर्द ए खाक किया। कड़ी पुलिस सुरक्षा के चलते माहौल शांतिपूर्ण रहा, हालांकि जुलूस में हथियारों के प्रदर्शन को पुलिस सख्ती से रोक नहीं पाई।
जानिए मोहर्रम का इतिहास
बता दें की 1400 साल पहले तारीक -ए - इस्लाम में कर्बला की जंग हुई थी। सऊदी अरब स्थित मदीना से कुछ दूर शासक यजीद ने पैगंबर मोहम्मद साहब के नवासे इमाम हुसैन से से गद्दीनशीन होने की घोषणा करने की इच्छा जताई थी।इमाम हुसैन का अवाम पर प्रभाव था और हजरत मोहम्मद के घराने ने यजीद को शासक मानने से इंकार कर दिया था। इमाम जब अपने 72 अनुयायियों के साथ मदीना छोड़ कर जा रहे थे तो कर्बला में यजीद की फौज ने उन्हें घेर लिया और जंग शुरू हुई। भीषण गर्मी के बीच मोहर्रम की सातवीं तारीख तक उनके पास खाने का सामान खत्म हो गया और भूखे प्यासे वो दसवीं मोहर्रम तक लड़ते रहे। शिया समाज मोहर्रम का पूरा माह गमी के रूप में मनाता है और दसवीं मोहर्रम को शिया और सुन्नी दोनों समुदाय के लोग जुलूस निकालते हैं और ताज़िए को सपुर्द ए खाक करते हैं।
पाए चौकी से शुरू हुआ जुलूस
सुबह पाए चौकी इमामबाड़े से ऐतिहासिक फूलों का ताजिया निकला। इसकी खास बात यह है की इस ताजिये के फूल अजमेर से मंगाए जाते हैं और सभी ताज़िए इसके पीछे चलते हैं। प्रशासन की कड़ी सुरक्षा के बीच ताजियों के निकलने का दौरा पूरा दिन चलता रहा। सबसे ज्यादा भीड़ अबुलाला दरगाह के आस पास रही। कर्बला में सैकड़ों की तादाद में ताजियों को दफन किया गया। जुलूस में नबी का दामन नहीं छोड़ेंगे, नारा ए तकबीर, अल्लाह हु अकबर के नारों के साथ कई लोग तिरंगा हाथों में लेकर चलते भी नजर आए। जगह जगह अकीदतमंदों ने करतब दिखाते हुए लोगों को रुकने पर मजबूर कर दिया।
Published on:
29 Jul 2023, 7:10 PM IST
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