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Mother’s day: आखिर क्यों रोता है मां का दिल

कमलानगर निवासी लक्ष्मी देवी के तीन बेटे हैं। तीनों ही ठीक कमा रहे हैं। छोटे बेटे टाइगर ने हाथ उठा दिया। दोनों बेटों ने रोका नहीं। मां समझ गई और रामलाल वृद्धाश्रम, सिकंदरा में रह रही है। मदर्स डे पर भी मां का दिल रोता रहता है।

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Bhanu Pratap Singh

May 07, 2016

Mother’s day

Mother’s day

आगरा। कहते हैं जब जन्म होता है, तो दुनिया में सबसे पहले मां का चेहरा देखने को मिलता है। उसका लाड़ प्यार और दुलार मिलता है, लेकिन जब मां जीवन के अंतिम पड़ाव पर होती है, तो वह अकेली हो जाती है। अपने जिस लाल की हर गलती को नजरंदाज करती है, वहीं लाल इस मां के लिए पराया हो जाता है। पत्रिका टीम ने बात की, एक ऐसी मां से, जिसके तीन बेटे हैं। भरा पूरा परिवार है, लेकिन इसके बाद भी ये मां वृद्धाआश्रम में अपने बेटों का इंतजार कर रही है। अपनी दर्द भरी कहानी बताते हुये इन मां की आंखों से आंसू छलके और फफक फफक के रो पड़ी।

बेलनगंज के मशहूर फैमली से रखती है ताल्लुक
नाम लक्ष्मी देवी उम्र 80 वर्ष, पति किशनदेव वर्मा, निवास कमला नगर। तीन बेटे- बड़ा बेटा राजकुमार, दूसरा बेटा श्याम और तीसरा बेटे का नाम है टाइगर। तीनों ही बेटे ठेकेदारी करते हैं। लक्ष्मी देवी बेलनगंज के मशहूर परिवार ग्यासी राम भगवान दास से हैं। पति किशन वर्मा की मौत 15 वर्ष पूर्व हुई। पति की मौत के बाद एक भी बेटे ने उन्हें अपने साथ नहीं रखा। मायका पक्ष भी साथ नहीं रखता, तो इन्हें शरण मिली रामलाल वृद्धाआश्रम, सिकंदरा में, जहां आज तीन वर्ष से ये जीवनयापन कर रही हैं।


mothers day
बेटे ने उठाया हाथ तो टूट गई आस
लक्ष्मी देवी ने बताया कि उनके छोटे बेटे टाइगर ने उन पर हाथ उठा दिया। बड़े बेटे राजकुमार और श्याम ने भी उसका कोई विरोध नहीं किया। वह समझ गई, कि अब बेटे नहीं चाहते हैं कि वह उनके साथ रहे। फिर भी मां अपने बेटे को कैसे छोड़ सकती है। पुत्रों और नातियों का मोह परिवार से अलग नहीं होने दे रहा था, लेकिन छोटे बेटे ने उसे घर से धक्का मारकर बाहर निकाल दिया। इसके बाद वह नहीं सोच पा रही थी कि क्या करे। आज भी उसकी निगाह रामलाल वृद्धाआश्रम के गेट पर रहती है कि काश उसका कोई बेटा तो उसे लेने जरूर आयेगा।

कभी रहती थी रानी की तरह, आज कोई नहीं
कमला नगर कर्मयोगी एनक्लेव आई ब्लॉक मकान नंबर 40 की रहने वाली 78 वर्षीय कमला रानी के पति आरपी शर्मा एलआईसी में अधिकारी थे। उनकी मौत के बाद इकलौते पुत्र मुकेश शर्मा के भरोसे सोचा बुढ़ापा गुजर जायेगा। जब तक करोड़ों का मकान कमला रानी के नाम रहा, तब तक मुकेश के लिए मां आंखों का तारा रही, लेकिन धीरे धीरे मां को अपने जाल में फंसाया और मां से अपने नाम मकान करा लिया। इसके बाद मां उस पर बोझ बन गई। मुकेश शर्मा का लोहे की सरिया का थोक का व्यापार है। पैसे की कमी नहीं है, लेकिन बुजुर्ग मां को अपने साथ रखने में शर्म आती है।

कम्यूटर शोरूम मालिक की मां भी देख रही राह
शाहदरा की रहने वाली 85 वर्षीय शांति जैन पत्नी स्व. सुभाष जैन आज चलने फिरने में लाचार है। उसके दो बेटे हैं। बड़े बेटे राजीव जैन का कैटरिंग का बड़ा व्यापार है। छोटा बेटा संजय जैन का नेहरू प्लेस, दिल्ली में कम्प्यूटर का शोरूम है। भरा पूरा परिवार है, किसी बात की कोई कमी नहीं है, लेकिन वृद्ध मां के लिए इन दोनों बेटों के पास चार रोटियों और इनके घरों में रहने के लिए एक कोना नहीं है। शांति जैन ने बताया कि पिछले दो वर्ष से वे रामलाल वृद्धा आश्रम में निवास कर रही हैं।

85 मांओं को अपने बच्चों का इंतजार
ये तो कुछ ऐसी मां थी, जिनकी कहानी आपके सामने बयां की गईं, लेकिन रामलाल वृद्धाश्रम में इनके साथ ही 85 मां और भी हैं, जो अपने पुत्रों के आने का इंतजार कर रही है। रामलाल वृद्धाआश्रम के मैनेजर शिवप्रसाद शर्मा ने बताया कि जब भी कोई मां आती है, तो उसे पूरे सम्मान के साथ यहां शरण मिलती है। प्रयास रहता है कि मां अपने पुत्रों से अलग न हो। लेकिन कुछ ही मामलों में बच्चे समझ पाते हैं।

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