आगरा। कहते हैं जब जन्म होता है, तो दुनिया में सबसे पहले मां का चेहरा देखने को मिलता है। उसका लाड़ प्यार और दुलार मिलता है, लेकिन जब मां जीवन के अंतिम पड़ाव पर होती है, तो वह अकेली हो जाती है। अपने जिस लाल की हर गलती को नजरंदाज करती है, वहीं लाल इस मां के लिए पराया हो जाता है। पत्रिका टीम ने बात की, एक ऐसी मां से, जिसके तीन बेटे हैं। भरा पूरा परिवार है, लेकिन इसके बाद भी ये मां वृद्धाआश्रम में अपने बेटों का इंतजार कर रही है। अपनी दर्द भरी कहानी बताते हुये इन मां की आंखों से आंसू छलके और फफक फफक के रो पड़ी।