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सागर रेड्डी ने अनाथालय से निकलकर छुआ बुलंदियों को, सुनाई संघर्ष की कहानी तो छलक पड़े आंसू, देखें वीडियो

-इंजीनियर बनने के बाद भी अनाथों के लिए कर दिया जीवन समर्पित-उनके प्रयास से महाराष्ट्र सरकार ने अनाथों के लिए एक फीसदी आरक्षण दिया

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आगरा

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Dhirendra yadav

Nov 25, 2019

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आगरा। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के 65वें राष्ट्रीय अधिवेशन में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महाराष्ट्र के युवा समाजसेवी सागर रेड्डी को यशवंत राव केलकर युवा पुरस्कार प्रदान किया। इस दौरान जब र सागर रेड्डी को मंच पर बोलने का मौका मिला, तो उन्होंने अपनी वो कहानी बताई, जिसे सुन हर व्यक्ति के नेत्र सजल हो उठे। सागर रेड्डी ने कहा कि उनके पिता और माता की हत्या केवल इस बात पर हुई थी कि मां दूसरी जाति की थी और पिता दूसरी जाति के थे। इसके बाद बचपन से ही अनाथालय में रहे। 17 साल 11 महीने पर बालिग होने के बाद को अनाथालय से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। अनाथालय से बाहर आए तो न आधार कार्ड ना कोई कागज, यहां तक कि इस बात को भी प्रमाणित नहीं कर पाए कि वह भारतवर्ष के ही रहने वाले हैं। ऐसी विषम परिस्थितियों में फुटपाथ पर सोए। लोगों से भीख मांग कर पेट भरा और महाराष्ट्र के मुंबई पहुंच गए।

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इस तरह हुआ इंजीनियर बनने का सपना
सागर ने बताया कि महाराष्ट्र के मुंबई में एक ऐसे शख्स से मुलाकात हुई, जो ईश्वर का रूप था। इस व्यक्ति ने न केवल पालन पोषण किया बल्कि इंजीनियर बनने का सपना पूरा कर दिया। सागर इंजीनियर बन चुके हैं और महाराष्ट्र में ही रह रहे हैं। इंजीनियर बनने के बाद वे दोबारा उसी अनाथालय पहुंचे, जहां उन्होंने अपना बचपन बिताया था।

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अनाथालय में मिली वो दीदी
सागर ने बताया कि अनाथलय में बहुत से लोगों से मुलाकात हुई, सब उनसे मिलने के लिए आतुर थे, तभी उनकी मुलाकात एक महिला से हुई। महिला सामने घूंघट में थी। सागर महिला से मिलना चाहते थे। मगर महिला अपना चेहरा नहीं दिखा रही थी। जबरदस्ती जब महिला घूंघट उठाया तो सागर के पैरों तले जमीन खिसक गई। यह वहीं महिला थी जिसने बचपन में उसे मां की तरह प्यार दिया था। उस समय उसकी उम्र सात वर्ष थी और सागर एक वर्ष के। सागर ने बताया कि उसका चेहरा आधा जला हुआ था। जब उसने पूछा ये सब कैसे हुआ, तो बताया कि पति ने उसे दहेज का शिकार बनाया है। इस घटना ने उन्हें अंदर तक झकझोर कर रख दिया। जिसके बाद उन्होंने अपना पूरा जीवन समाजसेवा के लिए समर्पित कर दिया।

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मिली बड़ी सफलता
सागर ने बताया कि उनका भी सपना था कि नौकरी मिलने के बाद एक परिवार और आराम का जीवन, लेकिन उन्होंने इन सबको छोड़ दिया और समाज के उन बच्चों के लिए कुछ करने का प्रण लिया, जो अनाथ हैं। सागर के प्रयास से महाराष्ट्र सरकार ने अनाथों के लिए एक फीसद का आरक्षण दिया। सागर ने बताया कि अनाथ बच्चों को जब राह नहीं मिलती, तो उनके मन में तमाम बाते आती हैं। ऐसे में अनाथालय से निकले वाले युवा गुंडे क्यों न बनें, युवतियों के सामने भी बड़ी मुश्किल होती है।

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