18 जनवरी 2026,

रविवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

डाॅक्टर बनने का मिलेगा सिर्फ एक चांस

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद से आगरा के सैकडों छात्रों को डाॅक्टर बनने का सिर्फ एक ही चांस मिलेगा।  

2 min read
Google source verification

image

Bhanu Pratap Singh

Apr 29, 2016

MBBS

MBBS

आगरा।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद से आगरा के सैकडों छात्रों के डाॅक्टर बनने के अरमानों पर पानी फिर गया है। अब उन्हें डाॅक्टर बनने का सिर्फ एक ही चांस मिलेगा। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब स्टेट मेडीकल एग्जाम यानि सीपीएमटी नहीं होगा। इससे कई छात्रों के अरमानों पर पानी फिर गया है। कारण है कि एआईपीएमटी और सीपीएमटी दोनों में ही छात्रों द्वारा एग्जाम की तैयारी किये जाने का लेबिल भी अलग अलग होता था।


ये हुआ बदलावा

बालूनी क्लोसिस के आगरा रीजन हैड डाॅ ललितेश यादव ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है, कि देश भर की मेडीकल काॅलेज की सीट भरे जाने के लिए सिर्फ एनईईटी यानि नेशनल एलिजिबिलिटी इंट्रेंस टेस्ट होगा। यह व्यवस्था इस बार से लागू हुई है। इस बार जिसने एआईपीएमटी का फार्म भरा है, वे एनईईटी में शामिल नहीं हो पायेंगें। एआईपीएमटी एक मई को और एनईईटी 24 जुलाई को होगा। जिनके द्वारा एआईपीएमटी का आवेदन नहीं भरा गया है, वे एनईईटी का आवेदन कर सकते हैं।


लाखों छात्रों के 1400 रुपए हुये बर्बाद

सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद लाखों छात्रों द्वारा सीपीएमटी के फार्म के लिए भरी गई फीस 1400 रुपए भी बर्बाद हो गई है। एग्जाम न होने से प्रतिछात्र द्वारा जमा की गई इस फीस को लेकर अभी तक काई आदेश नहीं आया है, कि यदि एग्जाम नहीं होगा, तो इस फीस को वापस किया जायेगा, या नहीं।


ये भी हुआ बड़ा नुकसान

अग्रवाल बंधु ज्ञान केन्द्र के निदेशक डाॅ जीडी अग्रवाल ने बताया कि प्रतियोगी, एआईपीएमटी और सीपीएमटी दोनों में अलग अलग लेबिल पर तैयारी करते थे। कहा जाये तो एआईपीएमटी वाले एनसीआरटी के आधार पर तैयारी करते थे, वहीं सीपीएमटी के लिए छात्र अन्य बुकों का सहारा लिया करते थे। एक ही टेस्ट होने से उन छात्रों के सपने टूटे हैं, जिनके द्वारा सिर्फ सीपीएमटी की तैयारी की जा रही थी।


ये होंगे फायदे

ऐसा नहीं है नई व्यवस्था से नुकसान ही हुआ है, कुछ फायदे भी होंगे। सबसे बड़ा फायदा तो यह हुआ है कि मेडीकल सीट बढ़ जायेंगी। प्राइवेट काॅलेज भी इस टेस्ट की सूची में शामिल हैं, यानि अभी तक लाखों रुपए का डोनेशन का खेल अब समाप्त हो जायेगा। अब सिर्फ फीस का भार उठाना पड़ेगा, जो मध्यमवर्गीय परिवारों के छात्र उठा सकते हैं। इसके अलावा छात्रों पर विभिन्न टेस्ट के लिए आवेदन फार्म भरने का झंझट भी समाप्त हो जायेगा। इससे उनका काफी पैसा भी बचेगा।


ये बोले छात्र

मेडीकल की तैयारी कर रहे छात्र धवल कुमार ने बताया कि साल भर की मेहनत का नतीजा एक ही टेस्ट के बाद आ जायेगा, पहले उम्मीद रहती थी, कि एक टेस्ट खराब हुआ, तो दूसरे में मेहनत कर सकते हैं। अग्रवाल बंधु ज्ञान केन्द्र के छात्र नीलेश ने बताया कि यदि किसी परेशानी के कारण एक एग्जाम खराब होता है, तो दूसरा मौका नहीं मिलेगा, यानि एक साल फिर से पिछड़ जायेंगें।

ये भी पढ़ें

image