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अयोध्या में राम मंदिर से पहले माता सीता का दर्द, देखें वीडियो

-दिल्ली के कवि गुणवीर राना ने अयोध्या को केन्द्र मानकर सुनाई पीड़ा राम के साथ ही रहेगी सदा अब राम की तू है घनिष्ठ अयोध्या जानकी जान से जाए भले जानकी नहीं है वरिष्ठ अयोध्या साथ में ऐसे न होता मेरे मुझे मानती जो तू कनिष्ठ अयोध्या राम से योग मिलाया जिन्होंने वे आज कहां हैं वशिष्ठ अयोध्या

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आगरा। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद भगवान श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या में राम मंदिर का मार्ग प्रशस्त हो गया है। केन्द्र सरकार को ट्रस्ट बनाना है। राम मंदिर निर्माण के बीच फरीदाबाद के कवि गुणवीर राना ने माता सीता की पीड़ा कविता के माध्यम से बताई है। अयोध्या से सीता माता को बहुत पीड़ा है। इस पीड़ा को शब्द दिए हैं कवि ने।

गजल शिरोमणि सम्मान मिला

महाकवि गोपालदास नीरज फाउंडेशन ट्रस्ट के सौजन्य से शुक्रवार की रात्रि में बल्केश्वर पार्क में सम्मान समारोह और कवि गोष्ठी आयोजित की गई। कवि गोपाल दासनीरज की पत्नी डॉ. मनोरमा शर्मा की 11वीं पुण्यतिथि पर यह आयोजन किया गया। काव्य गोष्ठी में दिल्ली के गुणवीर राना को गजल शिरोमणि की उपाधि से नवाजा गया। काव्य गोष्ठी का संचालन शशांक प्रभाकर और मंजीत सिंह ने संयुक्त रूप से किया। डॉ. वत्सला प्रभाकार और ऋचा पंडित ने व्यवस्थाएं संभालीं।

गुणवीर राना ने अयोध्या को लेकर माता सीता की पीड़ा कुछ इस तरह व्यक्त की-

राम के प्रेम में डूबी रही समझी न कभी मेरी पीर अयोध्या

आंसू ही पीने पड़ेंगे मुझे तुझे पीना है सरयू का नीर अयोध्या

छंद अनोखे लिखा रही हूं सुनकर मन हो अधीर अयोध्या

राम ने जैसे चुना तुलसी वैसे मैंने चुना गुणवीर अयोध्या

प्रेम ही प्रेम बसा था जहां वह कैसे बनी भ्रमजाल अयोध्या

मातु सा नेह दिया तुझको कब माना तुझे ससुराल अयोध्या

शान हूं मैं तेरे आंगन की विपदा में मत डाल अयोध्या

राम कहां हुए मेरे कभी ये तेरे थे तू ही संभाल अयोध्या

राम के साथ ही रहेगी सदा अब राम की तू है घनिष्ठ अयोध्या

जानकी जान से जाए भले जानकी नहीं है वरिष्ठ अयोध्या

साथ में ऐसे न होता मेरे मुझे मानती जो तू कनिष्ठ अयोध्या

राम से योग मिलाया जिन्होंने वे आज कहां हैं वशिष्ठ अयोध्या..

राम की दृष्टि में सृष्टि रही फिर कैसे लगा यह रोग अयोध्या

राम के साथ ही छिपी थी मैं राम के जैसा ही योग अयोध्या

राज लिखा था नसीब में तेरा तू राज को शौक से भोग अयोध्या

राम का राज रहेगा कहां जहां नारी सहेगी वियोग अयोध्या