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पागल नहीं हैं, मगर पागलखाने में हैं

मानसिक आरोग्यशाला में कुछ मरीज ऐसे हैं, जो इलाज के बाद पूरी तरह ठीक हो गये हैं, लेकिन आज भी उन्हें पागलखाने में रहना पड़ रहा है। कारण है न तो उनके घर का पता है और नाहीं परिजनों का।

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Bhanu Pratap Singh

Apr 20, 2016

Mental hospital

Mental hospital

आगरा।
मानसिक आरोग्यशाला में कुछ मरीज ऐसे हैं, जो इलाज के बाद पूरी तरह ठीक हो गये हैं, लेकिन आज भी उन्हें पागलखाने में रहना पड़ रहा है। कारण है न तो उनके घर का पता है और नाहीं परिजनों का। ऐसे में जायें, तो वे कहां जायें। इसी कारण इन मरीजों को मेंटल हाॅस्पीटल में दो दशक से भी अधिक का समय निवास करते हुये हो गया है।


30 मरीज का संसार बना मानसिक आरोग्यशाला

मानसिक आरोग्यशाला में ऐसे मरीजों की संख्या 30 है। इसमें से 17 पुरुष हैं और 13 महिलायें। परिजनों ने इनकी सुध नहीं ली। अब तो परिवार वालों को पहचान भी नहीं पायेंगे, क्योंकि उनसे मिले एक अर्सा बीत गया है। कुछ की आंखें धुंधलाने लगी हैं, तो कुछ का शरीर जवाब दे रहा है। परिजनों के आने की आश में निगाहें जरूर मानसिक आरोग्यशाला के गेट पर टिकी रहती हैं, लेकिन हर शाम को मन को बस यह कहकर समझा लेते हैं, कि मानसिक आरोग्यशाला ही हमारा संसार है।


इलाज के लिए भर्ती कराया, हो गये गुम

मेंटल हाॅस्पीटल के मेडिकल सुप्रीटेंडेंट डाॅ दिनेश राठौर ने बताया कि मानसिक आरोग्यशाला में कई वर्षों पूर्व नियमों में बहुत अधिक सख्ती नहीं थी। इसी का फायदा उठाते हुए परिवारीजनों द्वारा मरीजों को यहां भर्ती कराया गया। कुछ दिन तक तो वे मरीज को देखने के लिए आते रहे, लेकिन लम्बे समय तक उनकी बीमारी पर काबू नहीं पाया जा सका, तो परिजनों ने भी इनका साथ छोड़ दिया। अब ये मरीज पूरी तरह ठीक हो चुके हैं, लेकिन इनके परिजनों का कुछ भी अता पता नहीं है।


लगाये गये फर्जी एड्रेस प्रूफ

ऐसे मरीज जो ठीक होने के बाद भी मेंटल हाॅस्पीटल में रह रहे हैं, उनके घर और परिवार का पता लगाने के लिए आरोग्यशाला प्रशासन की ओर से काफी बार प्रयास किया गया। जिन एड्रेस के मरीज को भर्ती करने के दौरान लिखाया गया था, वहां पर परिजनों को ट्रेस किया गया, लेकिन जांच में पता चला, कि ये ऐड्रेस पूरी तरह फेक थे। ऐसे मामलों में पुलिस को भी सूचना दी जाती है।

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