मानसिक आरोग्यशाला में ऐसे मरीजों की संख्या 30 है। इसमें से 17 पुरुष हैं और 13 महिलायें। परिजनों ने इनकी सुध नहीं ली। अब तो परिवार वालों को पहचान भी नहीं पायेंगे, क्योंकि उनसे मिले एक अर्सा बीत गया है। कुछ की आंखें धुंधलाने लगी हैं, तो कुछ का शरीर जवाब दे रहा है। परिजनों के आने की आश में निगाहें जरूर मानसिक आरोग्यशाला के गेट पर टिकी रहती हैं, लेकिन हर शाम को मन को बस यह कहकर समझा लेते हैं, कि मानसिक आरोग्यशाला ही हमारा संसार है।