ये दिया तर्क
सैय्यद इब्राहीम हुसैन जैदी ने कहा कि नमाज पढ़ाने के लिए पुरातत्व विभाग द्वारा इमाम की नियुक्ति भी चली आ रही है। वर्तमान में सैय्यद सादिक अली इमाम नमाज पढ़ाते हैं, जिन्हें वेतन के रूप में पुरातत्व विभाग द्वारा प्रति माह 15 रुपये दिए जाते हैं। उन्होंने बताया कि 3 नवंबर 2018 को मस्जिद में मौजूद इमाम सैय्यद सादिक अली से अधिकारियों ने मौखिक रूप से असर की नमाज के समय नमाज पढ़ने व पढ़ाने से रोकने का प्रयास किया गया एवं वजू टैंक की रैलिंग में ताले डाल दिए गए। संवैधानिक रूप से मस्जिद, मंदिर, गिरजाघर और गुरुद्वारे में अपने मजहब के अनुसान पूजा, प्रार्थना, अरदास, नमाज करने का हक है। ऐसे में मस्जिद में नमाज पढ़ने व पढ़ाने से कोई भी विभाग या कानून नहीं रोक सकता है।