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ताजमहल पर नमाज के लिए इस आदेश से मुस्लिम समाज में आक्रोश, दिया गया ज्ञापन

400 वर्षों से रोजाना नमाज, जुमे की नमाज, ईदुलफितर एवं इदुलअजहा की नमाज के साथ ही पवित्र माह रमजान की महीने में रात्रि विशेष की नमाज यहां पढ़ी जा रही है।

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आगरा

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Dhirendra yadav

Nov 12, 2018

tajamahal

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आगरा। मस्जिद इंतजामियां कमेटी ने अधीक्षण पुरातत्वविद्, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को ताजमहल पर शाहजहां व बेगम मुमताज महल के मकबरे के पश्चिम की ओर बनी शाही मस्जिद में नमाज को लेकर ज्ञापन दिया है। ज्ञापन के माध्यम से बताया गया कि पिछले 400 वर्षों से रोजाना नमाज, जुमे की नमाज, ईदुलफितर एवं इदुलअजहा की नमाज के साथ ही पवित्र माह रमजान की महीने में रात्रि विशेष की नमाज यहां पढ़ी जा रही है। फिर यहां नमाज पर क्यों रोक लगाई जा रही है।

ये दिया तर्क
सैय्यद इब्राहीम हुसैन जैदी ने कहा कि नमाज पढ़ाने के लिए पुरातत्व विभाग द्वारा इमाम की नियुक्ति भी चली आ रही है। वर्तमान में सैय्यद सादिक अली इमाम नमाज पढ़ाते हैं, जिन्हें वेतन के रूप में पुरातत्व विभाग द्वारा प्रति माह 15 रुपये दिए जाते हैं। उन्होंने बताया कि 3 नवंबर 2018 को मस्जिद में मौजूद इमाम सैय्यद सादिक अली से अधिकारियों ने मौखिक रूप से असर की नमाज के समय नमाज पढ़ने व पढ़ाने से रोकने का प्रयास किया गया एवं वजू टैंक की रैलिंग में ताले डाल दिए गए। संवैधानिक रूप से मस्जिद, मंदिर, गिरजाघर और गुरुद्वारे में अपने मजहब के अनुसान पूजा, प्रार्थना, अरदास, नमाज करने का हक है। ऐसे में मस्जिद में नमाज पढ़ने व पढ़ाने से कोई भी विभाग या कानून नहीं रोक सकता है।

इससे नहीं कोई संबंध
उन्होंने बताया कि 15 जनवरी 2001 का गजट शुक्रवार की नमाज के संबंध में किया गया है। रोजाना की नमाज एवं अन्य नमाजों से इसका कोई संंबंध नहीं है। 26 जनवरी 2018 को जिलाधिकारी द्वारा मौखिक रूप से सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए शुक्रवार की नमाज में बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश पर रोक लगाई गई थी एवं आगरा के लोगों के लिए शुक्रवार के दिन नमाज पढ़ने की आदेश किए गए थे। इस आदेश में भी रोजाना होने वाली नमाज एवं अन्य नमाजों से कोई संबंध नहीं है। जनसूचना में मांगे गए प्रश्नों के जवाब में जिलाधिकारी द्वारा सुप्रीम कोर्ट का कोई भी हवाला नहीं देते हुए सुरक्षा कारणों से बाहरी नमाजियों पर पाबंदी लगाने को कहा गया है।

ये की मांग
उन्होंने मांग की है इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए इस विषय को गंभीरता से लें, जिससे परम्परागत रूप से हो रही नमाज को बदस्तूर जारी रखा जाए।

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