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आज का भारत भ्रष्टाचारी और चोरों का देश कैसे हो गया, RSS के सहसरकार्यवाह ने बताया कारण, देखें वीडियो

पराधीन काल में हमारी संस्कृति और परम्पराओं का जो क्षरण हुआराष्ट्र की आत्मा बचाने को पराधीनता काल में सिकुड़ गया भारतडॉ. कृष्ण गोपाल ने राष्ट्र निर्माण के लिए आध्यात्म पर दिया जोर

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आगरा

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Dhirendra yadav

Aug 16, 2019

RSS leader dr krishn gopal

RSS leader dr krishn gopal

आगरा। लगभग 1000 वर्ष के पराधीनता काल में हम जीते भी और हारे भी। अच्छी बात यह थी कि हमने संघर्ष नहीं छोड़ा। हम जीते और स्वतन्त्र राज हुआ। लेकिन राष्ट्र का क्या हुआ? पराधीनता काल में अपने राष्ट्र की आत्मा को बचाने के लिए हमें कछुए की तरह सिकुड़ना पड़ा। हमारे मूल मौलिक सिद्धान्त और परम्पराएं बदल गयीं। हम उन बदलावों को समझ नहीं पाए। जो बदला उसी को मूल समझ बैठे, जबकि यह विकृति है। पराधीन काल में हमारी संस्कृति और परम्पराओं का जो क्षरण हुआ, हमें उसका निर्माण करना है। राष्ट्र निर्माण का अर्थ सिर्फ भौगोलिक सीमाएं ही नहीं होता। भौतिकता राष्ट्र का शरीर और अलौकिकता उसकी आत्मा होती है।

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हमारे मूल मौलिक सिद्धांत बदल गए
सूरसदन में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर संस्कार भारती द्वारा आयोजित तिरंगा व्याख्यानमाला में मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सहसरकार्यवाहक डॉ. कृष्ण गोपाल ने कहा कि हमारे देश में टर्की, इटली, फ्रांस, चीन जैसे देशों से कई दार्शनिक और लेखक आए। सभी ने भारत को यहां के लोगों को अच्छा बताया। फिर आज का भारत भ्रष्टाचारी और चोरों का देश कैसे हो गया? क्योंकि हमारे मूल मौलिक सिद्धान्त बदल गए। आज जो है वह हमारे मौलिक संस्कार नहीं। वो देश जिसका विश्व की अर्थव्यवस्था में 35 फीसदी हिस्सा था, जहां महिलाएं, आचार्य हुआ करती थीं, गार्गी और मैत्रेयी जैसी महिलाओं के देश में बाल विवाह और पर्दा प्रथा कैसे आ गई? ऋषि वाल्मीकि और व्यास के राष्ट्र में छुआछूत कैसे पनपा? यह पराधीनता काल में धर्म की हानि थी। आज हमें समझना होगा कि हमारे राष्ट्र का मौलिक तत्व उसकी आत्मा क्या है और वह बरकरार है या नहीं।

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भारत आध्यात्मिक इकाई
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अभिनेता व निर्देशक डॉ. चंद्र प्रकाश द्विवेदी ने कहा कि चाणक्य के पास न सम्पत्ति थी न साधन। सिर्फ संकल्प था खंड-खंड में बटे राष्ट्र को एक सूत्र में पिरोने का। वह राष्ट्र के बड़े परिवर्तन के सूत्रपात बने। मन में प्रश्न उठा कि ऐसे संकल्प आते कहां से हैं। तब लगा भारत सिर्फ एक सांस्कृतिक देश ही नहीं बल्कि आध्यात्मिक इकाई भी है।

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भगवा ध्वज के कारण चाणक्य सीरियल पर हुई आपत्ति
डॉ. चंद्र प्रकाश द्विवेदी ने कहा मैंने कभी नहीं सोचा था कि मेरे सीरियल चाणक्य को रोके जाने कारण हमारे देश का प्राचीन भगवा ध्वज और हर-हर महादेव का उद्घोष हो सकता है। भगवा आरएसएस का ध्वज है। इसलिए तत्कालीन सरकार द्वारा आपत्ति होने पर लगा कि शायद सीरियल 4 एपीसोड के बाद बंद हो जाएगा। लेकिन पत्रकार अभय मुकाशी जैसे विचारों से अलग होने पर भी मेरे मित्रों के सहयोग से सीरियल चल सका। क्योंकि वह मानते थे कि यदि भगवा ध्वज को एक समूह नहीं देखना चाहता, इस कारण सीरियल पर रोक गलत है। उन्होंने भारत के राष्ट्रीय ध्वज के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि राष्ट्रीय ध्वज कमेटी बनी थी। जिसे सभी प्रांतों से बात कर राष्ट्रीय ध्वज का स्वरूप तय करना था। समिति का सुझाव भगवा ध्वज के लिए आया। यानि देश राष्ट्र का ध्वज भगवा चाहता था लेकिन इस प्रस्ताव को कांग्रेस कमेटी ने अस्वीकार कर दिया।

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नंद किशोर पांडेय ने किया विषय प्रवर्तन
कार्यक्रम अध्यक्ष पद्मश्री बाबा योगेन्द्र ने भी अपने विचार रखे। अतिथियों का स्वागत स्क्वाड्रन लीडर एके सिंह ने किया। विषय प्रवर्तन प्रो. नन्द किशोर पांडे व अतिथियों का परिचय डॉ. पंकज नगायच व अमीर चंद ने दिया। संचालन राज बहादुर राज व धन्यवाद ज्ञापन अजय अवस्थी ने किया। कार्यक्रम के प्रारम्भ में राष्ट्र गान व अन्त में वंदेमारतम भारतीय संगीतालय के विद्यार्थियों द्वारा गजेन्द्र सिंह के निर्देशन में किया गया।

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इनकी रही विशेष उपस्थिति
सांसद एसपी सिंह बघेल, राजकुमार चाहर, विधायक डॉ. जीएस धर्मेश, हेमलता दिवाकर, पुरुषोत्तम खंडेलवाल, महेश गोयल, योगेन्द्र उपाध्याय, निर्मला दीक्षित, विनोद माहेश्वरी, डॉ. आरसी मिश्रा, डॉ. संदीप अग्रवाल, डॉ. डीवी शर्मा, डॉ. मुनीश्वर गुप्ता, डॉ. अरविन्द गुप्ता, रामसकल गुर्जर, हरिशंकर, नरेश जिंदल, सुभाष बोहरा, विकास बैरी, नवीन गौतम, नरेश जिन्दल (सह संयोजक) आदि उपस्थित थे।

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