तो किसी दलित को नौकरी पर नहीं रखेंगा वैश्य समाज!

Abhishek Saxena | Publish: Aug, 12 2018 06:38:14 PM (IST) Agra, Uttar Pradesh, India

वैश्य समाज में आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को पिछड़ा वर्ग में आरक्षण की मांग व जीएसटी में पैनल्टी और सजा दोनों का प्रावधान गलत

आगरा। लोकसभा और राज्यसभा में एससी-एसटी अत्याचार निवारण संशोधन विधेयक को मंजूरी मिलने बाद वैश्यसमाज ने अब हुंकार भरी है। एससी एसटी एक्ट के विरोध में वैश्य समाज बड़ा प्रदर्शन करेगा। इसकी घोषणा रविवार को आगरा से हुई। अखिल भारतीय वैश्य एकता परिषद एवं ट्रेडर्स एंड डस्ट्रीज वैलफेयर एसोसिएशन के लोहामंडी स्थित अग्रसेन सेवा सदन में मंडलीय सम्मेलन में परिषद के अध्यक्ष डॉ.सुमंत गुप्ता ने बड़ा एलान किया।

लोकसभा के किसी भी दल ने एक्ट का विरोध नहीं किया
परिषद के अध्यक्ष डॉ. सुमन्त गुप्ता ने कहा कि लोकसभा में किसी भी दल ने एक्ट का विरोध नहीं किया। सभी पार्टियां वोट की राजनीति कर रही हैं। वैश्य समाज ने भारतीय जनता पार्टी को वोट देकर उन्हें सत्ता तक पहुंचाया। लेकिन, सरकार ने उल्टे वैश्य समाज पर जीएसटी, ई वे बिल थोप दिया। डॉ.सुमंत गुप्ता ने कहा कि वैश्य समाज को आॅनलाइन मार्केट खोखला कर रहा है। आॅनलाइन के चलते रिटेल का व्यापार हाथ से निकल रहा है। सरकार को इसमें परिवर्तन करना चाहिए।

सवर्णों को एक जुट होने की जरूरत
परिषद के राष्ट्रीय युवा अध्यक्ष विनय अग्रवाल ने कहा कि एससी-एसटी एक्ट के विरोध में सभी सवर्णों को एकजुट होना होगा। हमें इस पर विचार विचार करना होगा कि किसी दलित को नौकरी पर रखें या नहीं। यह एक्ट समाज में भेदभाव की भावना बढ़ाएगा। कार्यक्रम का शुभारम्भ डॉ. सुमन्त ने गांधी के चित्र के समक्ष जीप प्रज्ज्वलित कर किया। संचालन राष्ट्रीय उपाध्यक्ष विनोद अग्रवाल व धन्यवाद ज्ञापन मंडलाध्यक्ष मुरारीलाल गोयल ने किया। इस अवसर पर दिनेश कातिब को राष्ट्रीय सदस्यता प्रमुख, राकेश गुप्ता को राष्ट्रीय महासचिव, अभिषेक गुप्ता को राष्ट्रीय सचिव व आसाम व गुजरात प्रदेश का प्रभारी नियुक्त किया।

 

इनका हुआ विरोध
-लोकसभा व राज्य सभा में सुप्रीम कोर्ट द्वारा एससी-एसटी एक्ट में संशोधन के फैसले को पलटने का।

-जीएसटी में पैनल्टी के साथ सजा के प्रावधान का।

-रीटेल मार्केट को प्रभावित करने वाली ऑनलाइन मार्केट का।

-किसी सोसायटी के पंजीकृत कराने पर उसमें एक सदस्य के एससी होने की बाध्यता की।

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