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कहीं भतीजे अखिलेश पर भारी न पड़ जाएं चाचा शिवपाल, एक-एक कर मोर्चे के साथ आ रहे सपा के दिग्गज नेता

समाजवादी पार्टी का साथ छोड़कर शिवपाल के मोर्चे में आ रहे तमाम दिग्गज नेता।

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आगरा

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suchita mishra

Oct 18, 2018

sp-morcha

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आगरा। समाजवादी सेक्युलर मोर्चा का गठन के बाद शिवपाल यादव लगातार पार्टी के विस्तार में लगे हुए हैं। उन्होंने कांटे से कांटा निकालने की तरकीब अपनायी है। वे लगातार उन नेताओं से संपर्क साध रहे हैं जो समाजवादी पार्टी में उपेक्षा के शिकार हुए हैं। यही नहीं शिवपाल की कोशिशें कामयाब भी हो रही हैं और सपा के तमाम दिग्गज नेता पार्टी छोड़कर शिवपाल के मोर्चे में शामिल हो रहे हैं। शिवपाल इन नेताओं को पार्टी में बड़ा पद भी दे रहे हैं। लोकसभा चुनाव 2019 को देखते हुए इसे अखिलेश यादव के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

हाल ही पूर्व राज्यसभा सांसद और सपा के दिग्गज नेताओं में से एक वीरपाल सिंह यादव ने समाजवादी पार्टी से इस्तीफा दे दिया और सेक्युलर मोर्चे में शामिल हो गए। उनके साथ सैकड़ों समर्थकों ने भी समाजवादी सेक्युलर मोर्चा जॉइन कर लिया। वीरपाल सिंह मुलायम सिंह यादव के बेहद करीबी लोगों में से एक हैं और पार्टी के गठन के समय से जुड़े हुए थे। उन्हें बरेली में सपा का खास चेहरा माना जाता रहा है और वे 21 सालों तक लगातार पार्टी जिलाध्यक्ष रहे। उन्होंने यह कहते हुए इस्तीफा दिया कि पार्टी अपने सिद्धांतों से भटक गई है।

इनके बाद सपा के वरिष्ठ नेता डीपी यादव ने भी सपा का साथ छोड़ दिया है और मोर्चे का हाथ थाम लिया है। उनके साथ गांव के तमाम प्रधानों ने भी सेक्युलर मोर्चे की सदस्यता ग्रहण कर ली है। डीपी यादव ने कहा कि शिवपाल यादव नेता जी की नीतियों को आगे बढ़ा रहे हैं, जबकि अखिलेश यादव की सोच अलग है।

बता दें कि कुछ समय पहले शिवपाल यादव ने 30 जिला अध्यक्षों की सूची जारी की थी। इसमें ज्यादातर नाम सपा के नेताओं के ही थे। इसके अलावा वे अब सपा के तमाम मुस्लिम चेहरे अपने साथ लाने में कामयाब हुए हैं। यादव और मुस्लिम समुदाय को समाजवादी पार्टी का खास वोट बैंक माना जाता है। ऐसे में उनकी ये कोशिश सीधेतौर पर सपा के वोट बैंक में सेंधमारी के तौर पर है।

वहीं राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि समाजवादी पार्टी को स्थापित करने में मुलायम सिंह और शिवपाल यादव दोनों का बड़ा योगदान रहा है। शिवपाल की कार्यकर्ताओं के बीच खासी पकड़ है। यही कारण है कि उन्हें हमेशा पार्टी में नंबर दो की हैसियत से देखा जाता था। इन स्थितियों के बीच राजनीतिक गलियारों में भी ये चर्चा है कि कहीं चाचा शिवपाल भतीजे अखिलेश पर भारी न पड़ जाएं।