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आगरा के ब्यूटी पार्लर : अच्छी सूरत को संवारें

समय के साथ-साथ सामाजिक मान्यताएं, परंपराएं, दशाएं और स्थितियां बदलती चली गई। आज आगरा के कस्बों-गांवों तक में हेयर कटिंग सैलून की जगह ब्यूटी प्वॉइंट और स्पा खुल चुके हैं। जहां केवल हेयर कटिंग व सेटिंग ही नहीं होती वरन नख से शिख तक का सौंदर्य संवारने के तमाम साजो-सामान मौजूद होते हैं।

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Vikas Kumar

Mar 18, 2016

beauty parlour agra

beauty parlour agra

आगरा.
एक जमाने में गांव-कस्बों और शहरों में पुरुषों और बच्चों के बड़े बालों को काटने-संवारने के हेयर कटिंग सैलून हुआ करते थे। वहीं, लड़कियों व महिलाओं के बाल काटना मानो अपराध समझा जाता था। ब्याह-शादी के विशेष मौकों पर भी घर-परिवार की महिलाएं परम्परागत बनाव-शृंगार को ही तवज्जो दिया करती थी। समय के साथ-साथ सामाजिक मान्यताएं, परंपराएं, दशाएं और स्थितियां बदलती चली गई। आज आगरा के कस्बों-गांवों तक में हेयर कटिंग सैलून की जगह ब्यूटी प्वॉइंट और स्पा खुल चुके हैं। जहां केवल हेयर कटिंग व सेटिंग ही नहीं होती वरन नख से शिख तक का सौंदर्य संवारने के तमाम साजो-सामान मौजूद होते हैं। ये सच है कि अच्छी सूरत को संवरने की जरूरत नहीं होती, लेकिन हर सूरत दूसरों से अच्छा दिखने की आरजू हर युग में किया करती है। खुद को दूसरों से बेहतर दिखाने की ललक ने ही 'मेकओवर कांसेप्टÓ को बढ़ावा दिया है। मेकअप जहां किसी एवरेज ब्यूटी को मार्वलस ब्यूटी बना देता है, वहीं मेकओवर की कला एक अत्यंत साधारण व्यक्तित्व को निखारने-चमकाने और उसे ग्लैमरस लुक देने का काम करती है।


ब्यूटी के लिए मेकओवर का सहारा

मनोवैज्ञानिक सुधा भंडारी बताती हैं कि भले ही कुछ समय पूर्व तक इन ब्यूटी जंक्शंस पर शायद समाज के चंद प्रतिष्ठित ऊंचे तबकों के लोग ही रूप निखार के लिए पहुंचते थे, लेकिन आज फैशन के युग में हर कोई एक-दूजे से ज्यादा सुंंदर दिखने की होड़ में शामिल नजर आने लगा है। बनने-संवरने का काम जहां कल तक फिल्म स्टार, ड्रामा, टीवी-आर्टिस्ट की हदों तक सीमित थी, आज वर्जनाएं टूट कर आमजन के शगल का हिस्सा बन चुकी हैं। सही मायनों में देखा जाए तो ब्यूटी रोजमर्रा जिंदगी की जरूरत लगने लगी है। कभी अवसर विशेष के लिए किए या कराए जाने वाले सौंदर्य निखार अब रूटीन लाइफ को इतना प्रभावित कर चुके हैं कि टीवी-सिनेमा-थिएटर की शूटिंग के अलावा आज व्यापारिक गतिविधियों और नौकरियों पर जाने से पूर्व तक कॉमन मैन को सौंदर्यबोध कराने के लिए मेकओवर का सहारा गाहे-ब-गाहे लेना ही पड़ता है।


क्या है मेकओवर

तकनीकी रूप से ब्यूटी पार्लर और ब्यूटीशियंस मेकअप और मेकओवर को ठीक से परिभाषित अथवा प्रतिपादित कर सकते हैं। दोनों क्रियाएं एक-दूसरे की पूरक होकर समानांतर प्रतिक्रिया में संलग्न रहती है। जहां मेकअप तकनीशियन की समझ, मेहनत और दक्षता ही वांछित परिणाम दे सकती है।


क्या है प्रोसिजर

स्पेशल ओकेजन, क्लाइंट रिक्वायरमेंट और वेदर के अकॉर्डिंग टॉप टू बॉटम ट्रीटमेंट से ब्यूटी ग्रूम करना मेकओवर को परिभाषित करता है।अवसर विशेष की पार्टीज, पिकनिक, गेट-टू-गेदर, हनीमून, एनिवर्सरीज, बर्थ डे, सगाई, शादी, किटी पार्टीज, इंटरव्यू, सेमिनार, स्पेशल सोशल गेदरिंग, इवेंट्स, मॉडलिंग, शूटिंग, लड़का-लड़की पसंद करने के अवसर पर।

परिस्थिति और अवसर विशेष के अलावा फिजिकल कंडीशंस पर बहुत कुछ डिपेंड करता है। नॉर्मली डेढ़-दो घंटे से आठ-दस घंटे सिटिंग भी लग सकती है। बॉडी ट्रीटमेंट, हेयर कट, कलरिंग, हेयर स्टाइल, फेशियल, ब्लीच, आईब्रो, मेनिक्योर-पेडिक्योर, स्टीम बाथ, डे्रेसिंग, ज्वैलरी, पर्सनेलिटी इम्प्रूवमेंट एक्सरसाइज आदि। जरूरत के अनुसार, कम से कम एक हजार से लेकर दस-पंद्रह हजार तक अनुमानित खर्च आ सकता है। इनमें भी तीन कैटेगरी हैं- एवरेज, मीडियम, हायर पैकेज।


मेकओवर ट्रेंड्स-

- ओकेजन व एज के अकॉर्डिंग लाइट-हैवी मेकओवर चूज हो। पार्टी के लिए जहां शाइनी-शिमर लुक प्रिफर किया जा रहा है, वहीं ऑफिस व इंटरव्यू के लिए मेट फिनिश लुक ट्रेंडी है।

- ये बातें रखती हैं मायने- पार्लर का सलेक्शन, रिक्वायरमेंट, बजट, एज फैक्टर, ट्रेंड ब्यूटीशियन, क्वालिटी प्रोडक्ट्स

- कभी-कभी फिजिकल और सर्जिकल ट्रीटमेंट भी सजेस्ट किए जा सकते हैं।

नाक-दांतों की शेप, दांत की चमक, स्किन पर पड़े दाग-धब्बों के लिए, पीलिंग एंड एक्यूपंक्चर (नीडिल थैरेपी)


बदल जाती है पर्सनेलिटी

सेक्टर तीन स्थित फस्र्ट इम्प्रेशन स्पा एकेडमी एंड ब्यूटी क्लिनिक की पूर्णिमा झाला के अनुसार, समूचे व्यक्तित्व को बदलना मेकओवर की श्रेणी में आता है। इसमें क्लाइंट के लुक्स और प्रोफेशन को ध्यान में रख कर उनका मेकअप, हेयर स्टाइल, ड्रेसिंग व बॉडी लैंग्वेज पर एक्सरसाइज की जाती है।


मेकओवर का के्रज सभी में

सिकंदरा में स्मार्ट लेडिज पार्लर चलाने वाली श्वेताशा बताती हैं, मेकओवर का के्रज युवाओं में तो है ही, बढ़ती उम्र में भी सदा जवां और फिट दिखने की चाहत ने इन दिनों आमजन में इस कला को पॉपुलर बनाया है, लेकिन चूंकि मेकओवर अपेक्षाकृत महंगी क्रिया है तो क्लाइंट को चाहिए कि वह पूरी सावधानी और छानबीन के बाद ही किसी ट्रेंड ब्यूटीशियन से सलाह और ट्रीटमेंट लें।


नेचुरल ब्यूटी लॉन्ग लास्टिंग

मंटोला स्थित शाहनाज हुसैन ब्यूटी क्लिनिक की शहनाज बताती हैं, कम्पलीट रेस्ट, डाइट और योगा से हेयर, स्किन हमेशा लाइव रहते हैं और नेचुरल ब्यूटी ही लॉन्ग लास्टिंग रहती है। बाकी टेम्परेरी मेकओवर दो से पांच घंटे सिटिंग डिमांड करता है। खर्च क्लाइंट पर की गई मेहनत के अनुसार घटता-बढ़ता है।


बेहद प्रभावी प्रक्रिया

ईव्ज ब्यूटी पार्लर की माधवी डॉली शर्मा बताती हैं, मेकओवर भले ही टेम्पररी ट्रीटमेंट हो, समय और जरूरत के मुताबिक बेहद प्रभावी क्रिया है। इससे एक सामान्य व्यक्तित्व को आकर्षक बनाया जा सकता है। रूटीन लाइफ में भी सौंदर्य बोध का बहुत महत्व है। मेकओवर के लिए फीगर और बॉडी कलर के अनुसार क्लोदिंग, ज्वैलरी का सलेक्शन और मेकअप सजेस्ट किया जाता है। बॉडी फिटनेस के टिप्स भी बेहद जरूरी हैं। मिशन कम्पाउंड स्थित एंजल्स हेयर एंड स्किन केयर की नीलपिंकी केसरी के अनुसार, मेकओवर से न केवल सुंदरता निखरती है, बल्कि व्यक्तित्व आकर्षक होता है। क्लाइंट का कॉन्फिडेंस भी बढ़ता है जो सबसे महत्वपूर्ण फैक्टर है। इसके अंतर्गत यदि थोड़ा समय पर्सनेलिटी इम्प्रूवमेंट कोर्सेज को दिया जाए तो कम्पलीट ग्रूमिंग के चांसेज बढ़ जाएंगे। केयर ब्यूटीपार्लर की प्रिया राजपुरोहित बताती हैं, मेरी नजर में सौंदर्य दो प्रकार का होता है। एक आंतरिक और दूसरा बाह्य। मेकअप बाह्य सौंदर्य को संवारने का काम करता है जबकि मेकओवर प्रक्रिया से आंतरिक सौंदर्य को भी निखार कर व्यक्तित्व की आभा द्विगुणित की जा सकती है। इसे पर्सनेलिटी ग्रूमिंग कहा जा सकता है।