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जानिए गुरुवार के दिन क्यों नहीं धोए जाते हैं बाल और क्यों नहीं काटे जाते हैं नाखून

ज्योतिषाचार्य से जानें गुरुवार के दिन कौन से काम करने चाहिए और कौन से काम नहीं करने चाहिए।

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आगरा

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suchita mishra

Dec 27, 2018

आगरा। शास्त्रों में गुरुवार के दिन कुछ कार्यों को करने के लिए मना किया गया है। हममें से ज्यादातर लोग बचपन से इन बातों को हम सुनते तो आए हैं, लेकिन इनके पीछे छिपे उद्देश्य को नहीं जानते। दरअसल बृहस्पति देवताओं के गुरू होने के अलावा सबसे बड़ा ग्रह भी हैं। यदि कुंडली में बृहस्पति की स्थिति कमजोर हो जाए तो व्यक्ति को तमाम संकटों का सामना करना पड़ सकता है। जो कार्य बृहस्पति को कमजोर करने का काम करते हैं, उन्हें इस दिन करना वर्जित बताया गया है। ज्योतिषाचार्य डॉ. अरविंद मिश्र बता रहे हैं, उन कार्यों के बारे में गुरुवार के दिन करने से बचना चाहिए। साथ ही कुछ ऐसे उपाय जिन्हें गुरू की स्थिति को मजबूत करने के लिए गुरुवार के दिन करना चाहिए।

ये काम न करें
डॉ. अरविंद मिश्र बताते हैं कि इस दिन सिर धोने, बाल कटवाने, शेविंग करने व नाखून आदि काटने से परहेज करना चाहिए। इससे धन संबन्धी परेशानियां आती हैं, साथ ही उन्नति बाधित होती है। वहीं घर की सामान्य सफाई करने में कोई हर्ज नहीं है, लेकिन खासतौर पर इस दिन सफाई व धुलाई आदि न करें। अधिक भारी भरकम कपड़े जो कभी कभार धोए जाते हैं, उन्हें गुरुवार के बजाय किसी अन्य दिन धोएं। घर का कबाड़ बाहर न फेंकें। गंदगी वाले किसी भी काम से इस दिन परहेज करें। इससे बच्चों, पुत्रों, घर के सदस्यों की शिक्षा आदि प्रभावित होती है।

शुभ काम जरूर करें
डॉ. अरविंद मिश्र के मुताबिक गुरुवार के दिन ज्यादातर शुभ कार्य करने चाहिए। कहा जाता है कि जो काम गुरुवार के दिन शुरू किए जाते हैं उनकी जीवन में पुनरावृत्ति होती है। इसलिए गुरुवार के दिन केवल शुभ काम करें, ताकि जीवन में बार बार शुभ अवसर आएं।

भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें
विष्णु भगवान और लक्ष्मी की पूजा करने से दूर होतीं सारी परेशानियां
भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी संपन्नता के प्रतीक हैं। गुरुवार के दिन इनका पूजन करने से बृहस्पति की कमजोर स्थिति मजबूत होती है। ऐसा करने से परिवार में धन धान्य की कमी नहीं रहती। पति पत्नी के रिश्ते में मिठास बढ़ती है। घर में संपन्नता बनी रहती है, दरिद्रता दूर हो जाती है और पारिवारिक क्लेश खत्म हो जाते हैं। पूजन के लिए लक्ष्मी नारायण की फोटो के सामने घी का दीपक जलाएं। उन्हें गुड़ चने का भोग लगाएं और बृहस्पति की कथा का पाठ करें।