आगरा। उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के जिलाध्यक्ष वीरेन्द्र छौंकर ने कहा 25 जुलाई को सर्वोच्च न्यायालय ने जो निर्णय दिया था, उसके बाद से शिक्षामित्र आहत हैं, लेकिन शिक्षामित्रों की दयनीय स्थिति सुप्रीम कोर्ट के आदेश की वजह से नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की योगी सरकार की वजह से हुई है। सुप्रीम कोर्ट ने समायोजन रद्द किया था, लेकिन ये बिलकुल भी नहीं कहा था, कि शिक्षामित्रों को मरने के लिए छोड़ दिया जाए। एक वर्ष में 700 शिक्षामित्र अपनी जान गवां चुके हैं, लेकिन सरकार के कान पर जूं तक नहीं रेंगी। शिक्षामित्र जो उस समय काम कर रहे थे, वही काम आज कर रहे हैं। सरकार ने समायोजन रद्द होने के बाद में इतना भी मानदेय तय नहीं किया, जिससे शिक्षामित्र अपने परिवारों का भरण पोषण सही से कर सकें। जिलाध्यक्ष वीरेन्द्र छौंकर ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग की है कि उत्तराखंड सरकार की तर्ज पर योगी सरकार भी शिक्षामित्रों के लिए कुछ ऐसे कदम उठाये, जिससे शिक्षामित्रों की लगातार हो रही मौतों का सिलसिला थम सके और शिक्षामित्र अपने परिवारों का भरण पोषण कर सकें।